M-SHOP मॉडल से खेती की तस्वीर बदलने की तैयारी, किसानों की कमाई बढ़ने का फॉर्मूला

किसानों की आमदनी बढ़ाने और खेती को मुनाफे का काम बनाने पर सरकार का जोर है. फसल विविधीकरण, हाई वैल्यू खेती और बाजार से सीधा जुड़ाव इस पहल का आधार है. नई योजना से जिलावार खेती, निर्यात बढ़ेगा और किसानों को कम लागत में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है भी साफ दिख रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 15 Apr, 2026 | 08:55 PM

Agriculture Earning Model: अब खेती सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि मुनाफे का मजबूत जरिया बने, इसी सोच के साथ कृषि विकास को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है. किसानों की आमदनी बढ़ाने, फसलों में विविधता लाने और बाजार से सीधा जोड़ने को लेकर एक अहम बैठक आयोजित की गई. इस बैठक का मकसद साफ था कि खेती को टिकाऊ, फायदेमंद और भविष्य के लिए मजबूत बनाना, ताकि किसान कम लागत में ज्यादा कमाई कर सकें.

किसानों की कमाई बढ़ाने पर फोकस, नई सोच के साथ योजना

बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि खेती को पुराने तरीके से निकालकर आधुनिक और बाजार की मांग  के अनुसार ढालना जरूरी है. सरकार चाहती है कि किसान सिर्फ एक फसल पर निर्भर न रहें, बल्कि अलग-अलग और ज्यादा मुनाफा देने वाली फसलों की खेती करें. इसके लिए जिलावार और मौसम के हिसाब से खेती की योजना बनाने पर सहमति बनी. कहा गया कि हर इलाके में वही फसल बढ़े, जो वहां के मौसम और जमीन के लिए सबसे बेहतर हो.

M-SHOP मॉडल से बदलेगी खेती की तस्वीर

बैठक में M-SHOP नाम के एक नए मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई. इस मॉडल में मार्केटिंग, मसाले, बागवानी, तिलहन और दलहन को खेती की रीढ़ बनाया जाएगा. इसका मकसद यह है कि किसान सिर्फ फसल उगाएं ही नहीं, बल्कि उसे सही बाजार तक पहुंचाकर बेहतर दाम भी पाएं. मसाले, फल-सब्जी, दाल और तेल वाली फसलों पर खास ध्यान देने की बात कही गई, ताकि किसानों की आय में सीधा इजाफा हो सके.

उच्च मूल्य वाली फसलों की ओर बढ़ता बिहार

बैठक में यह भी तय हुआ कि अब ऐसी फसलों को बढ़ावा  दिया जाएगा, जिनकी बाजार में ज्यादा मांग और कीमत है. टमाटर, ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी, बादाम, हरा चना और शहजन जैसी फसलों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया. कुछ जिलों में खास फसलों के लिए लक्ष्य तय करने की बात भी सामने आई, ताकि वहां के किसान नई खेती अपनाकर अच्छी कमाई कर सकें. इसके साथ ही बासमती और हाइब्रिड धान, अरहर, मटर, सोयाबीन, सूर्यमुखी और चिया सीड जैसी फसलों पर भी ध्यान दिया जाएगा.

निर्यात और बीज व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी

खेती को अंतरराष्ट्रीय बाजार  से जोड़ने के लिए मल्टी मॉडल हब विकसित करने की जरूरत बताई गई. इससे किसानों को अपनी उपज बाहर के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी. दलहन और तिलहन के उत्पादन को बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की बात कही गई. इसके साथ ही बीज उत्पादन में सरकारी और निजी संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया गया, ताकि किसानों को अच्छी क्वालिटी के बीज समय पर मिल सकें.

किसान की जरूरत से बनेगी नीति

बैठक में साफ कहा गया कि कोई भी योजना तभी सफल होगी, जब किसान उसे अपनाएंगे. इसलिए सभी योजनाएं किसानों की जरूरत, जमीन, मौसम और व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी. सरकार का लक्ष्य है कि खेती किसानों  के लिए बोझ नहीं, बल्कि भरोसेमंद कमाई का साधन बने. यह बैठक इसी दिशा में एक मजबूत कदम मानी जा रही है.

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Published: 15 Apr, 2026 | 02:11 PM
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