मॉनसून में करें सहजन की खेती.. सिर्फ 6-8 महीने में शुरू होगी कमाई, सालाना 2 लाख रुपये तक मुनाफा

मॉनसून का मौसम सहजन की खेती शुरू करने का बेहतरीन समय माना जाता है. यह फसल कम लागत, कम पानी और लंबे समय तक उत्पादन देने के लिए जानी जाती है. इसकी फलियां और पत्तियां दोनों अच्छी कीमत पर बिकती हैं, जिससे किसानों को हर साल बेहतर और स्थायी कमाई का मौका मिल सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 5 Jul, 2026 | 02:17 PM

Moringa Farming: मॉनसून का मौसम सहजन (मुनगा) की खेती शुरू करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. यह ऐसी नकदी फसल है, जिसमें एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है. कम लागत, कम पानी की जरूरत और बाजार में लगातार बढ़ती मांग के कारण सहजन की खेती किसानों के लिए स्थायी आय का मजबूत विकल्प बनकर उभर रही है. खास बात यह है कि इसकी फलियों के साथ-साथ पत्तियां भी अच्छी कीमत पर बिकती हैं, जिससे किसानों की कमाई के कई रास्ते खुल जाते हैं.

कम समय में शुरू होता है उत्पादन

कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार के अनुसार, सहजन की खेती  की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके पौधे बीज बोने के लगभग 6 से 8 महीने के भीतर फलियां देना शुरू कर देते हैं. एक स्वस्थ पेड़ से सालभर में 200 से 400 फलियां प्राप्त की जा सकती हैं. एक बार पौधे तैयार होने के बाद कई वर्षों तक नियमित उत्पादन मिलता रहता है. अनुकूल परिस्थितियों में किसान साल में दो बार तक फलियों की अच्छी पैदावार ले सकते हैं, जिससे आय लगातार बनी रहती है.

मॉनसून में करें बुवाई, इन बातों का रखें ध्यान

विशेषज्ञ के अनुसार सहजन की बुवाई  के लिए जून और जुलाई का समय सबसे बेहतर होता है. इसकी खेती गर्म और अपेक्षाकृत शुष्क जलवायु में अच्छी होती है, जहां तापमान 25 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहे. अच्छी जल निकासी वाली हल्की दोमट मिट्टी और 6.0 से 7.5 pH वाली भूमि इसके लिए उपयुक्त मानी जाती है. बुवाई के समय पौधों के बीच 2.5×2.5 मीटर या 3×3 मीटर की दूरी रखनी चाहिए. पौधे लगाने से पहले लगभग एक फीट गहरे गड्ढे तैयार कर उनमें गोबर की सड़ी खाद और मिट्टी का मिश्रण भरना लाभदायक रहता है. इससे पौधों की शुरुआती वृद्धि बेहतर होती है.

कम पानी, कम खर्च और ज्यादा उत्पादन

सहजन की खेती में सिंचाई की आवश्यकता अन्य फसलों की तुलना में काफी कम होती है. शुरुआती दो महीनों तक हल्की सिंचाई पर्याप्त रहती है, जबकि बाद में जरूरत के अनुसार ही पानी देना होता है. जलभराव से बचाव करना जरूरी है क्योंकि अधिक पानी पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. हर वर्ष प्रति पौधा 5 से 10 किलोग्राम गोबर की खाद देने से उत्पादन और पौधों की सेहत बेहतर बनी रहती है. यही कारण है कि कम लागत वाली यह खेती सीमित संसाधनों वाले किसानों के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है.

फलियों के साथ पत्तियां भी बढ़ाएंगी कमाई

सहजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका लगभग हर हिस्सा आर्थिक रूप से उपयोगी होता है. फलियों के अलावा इसकी पत्तियों की भी बाजार  में अच्छी मांग रहती है. पत्तियों को सुखाकर उनका पाउडर तैयार किया जाता है, जिसका उपयोग खाद्य और स्वास्थ्य उत्पादों में किया जाता है. एक एकड़ में सहजन की खेती से औसतन 5 से 9 टन तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है. अच्छी बाजार कीमत मिलने पर किसान 1 से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं. यदि खेती वैज्ञानिक तरीके और सही समय पर की जाए, तो सहजन लंबे समय तक नियमित आय देने वाली लाभदायक फसल साबित हो सकती है.

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Published: 5 Jul, 2026 | 01:46 PM

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