कम समय में ज्यादा मुनाफा देने वाली है मटर की ये अगेती किस्म, 100 क्विंटल तक मिलेगी पैदावार

मटर की अगेती किस्म आर्केल एक उन्नत किस्म है जो कि कम समय में अच्छी पैदावार देने और अपने अच्छे स्वाद के लिए किसानों के बीच लोकप्रिय है. अगेती मटर की इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित किया गया है.

अनामिका अस्थाना
नोएडा | Published: 21 Sep, 2025 | 09:50 PM

Pea Farming: रबी सीजन की शुरुआत होने वाली है, ऐसे में जो किसान बाजार में रबी फसलों की उपज लेकर जल्दी पहुंचना चाहते हैं और अच्छी कमाई करना चाहते हैं वे मटर की अगेती किस्म आर्केल की खेती कर सकते हैं. जी हां, अगेती मटर की इस किस्म की बुवाई के लिए सितंबर के आखरी सप्ताह से लेकर नवंबर तक का समय बेस्ट होताी है. यूं तो मटर की मांग बाजार में हर मौसम में रहती है लेकिन सर्दियों के दिनों में इसकी खपत बढ़ जाती है. यही कारण है कि किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती करते हैं और बाजार में अपनी उपज बेचकर अच्छी कमाई कर सकते हैं.

आर्केल मटर की खासियत

मटर की अगेती किस्म आर्केल एक उन्नत किस्म है जो कि कम समय में अच्छी पैदावार देने और अपने अच्छे स्वाद के लिए किसानों के बीच लोकप्रिय है. अगेती मटर की इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) द्वारा विकसित किया गया है. देशभर के किसानों इस किस्म की खेती करना पसंद करते हैं. ऐसे किसान जो जल्दी फसल लेकर बाजार में पहले पहुंचना चाहते हैं, उनके लिए यह किस्म बेस्ट है. इसके अलावा अगेती मटर की ये किस्म फसल में लगने वाली आम बीमारियों जैसे झुलसा आदि से लड़ने की भी क्षमता रखती है.

ऐसे करें खेत की तैयारी

आर्केल मटर की खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे सही मानी जाती है. इसकी खेती से पहले खेत को अच्छी तरह से 2 से 3 बार गहराई से जोतकर मिट्टी को भुरभुरा कर लें ताकि खरपतवार नष्ट हो सकें. इसके बाद आखरी जुताई के समय मिट्टी में 10 से 15 टन गोबर की सड़ी हुई खाद (Organic Fertilizer) को अच्छे से मिलाएं. इसके बीजों की बुवाई से पहले खेत में 2 फीट चौड़ी और लंबी मेड़ें (beds) बनाएं ताकि फसल की सिंचाई और देखभाल में आसानी हो. किसानों को ध्यान रखना होगा कि खेत में जलभराव न होने दें, ऐसा होने पर फसल की जड़ें सड़ सकती हैं.

बीज बुवाई का सही तरीका

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगेती मटर आर्केल की प्रति हेक्टेयर फसल के लिए 40 से 50 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे इस किस्म के प्रमाणित बीजों का ही इस्तेमाल करें और बेहतर होगा कि वे बुवाई से पहले प्रति किलोग्राम बीज की दर से 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम या फिर ट्राइकोडर्मा से बीजों का उपचार (Seed Treatment) कर लें. इसके बीजों को बोते समय किसान इस बात का ध्यान रखें कि वे कतार में बीजों को 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी पर बोएं और मिट्टी में 3 से 4 सेंटीमीटर गहराई में डालें.

कटाई का समय और पैदावार

मटर की अगेती (Pea Early Variety) किस्म आर्केल बीज बुवाई के 60 से 65 दिन बाद पककर तैयार हो जाती है. किसानों को सलाह दी जाती है कि जब इसकी फलियां हरी, चमकदार और दाने मुलायम हों तभी फलियों की तुड़ाई करें. बात करें मटर की इस किस्म से होने वाली पैदावार की तो अगर इसकी फसल की अच्छे से देखभाल की जाए तो प्रति हेक्टेयर फसल से किसान औसतन 80 से 100 क्विंटल तक पैदावार ले सकते हैं.

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Published: 21 Sep, 2025 | 09:50 PM
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