Intercropping Farming : खेतों में खड़ी फसल को आवारा जानवरों से बचाना आज किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. नीलगाय, छुट्टा मवेशी और अन्य जानवर रातों-रात महीनों की मेहनत पर पानी फेर देते हैं. ऐसे में किसान अब महंगे तार, बाड़ या रखवाली की बजाय खेती का ही ऐसा तरीका अपना रहे हैं, जो फसल की सुरक्षा के साथ कमाई भी बढ़ा दे. इसी कड़ी में सहफसली खेती के तहत गन्ने के साथ हरी धनिया उगाने का प्रयोग किसानों के लिए कारगर साबित हो रहा है.
हरी धनिया बनी प्राकृतिक सुरक्षा कवच
किसानों के अनुभव बताते हैं कि हरी धनिया की तेज खुशबू आवारा जानवरों को खेत के पास आने से रोकती है. गन्ने की कतारों के बीच धनिया लगाने से खेत एक तरह की प्राकृतिक दीवार में बदल जाता है. मवेशी खेत के आसपास तो आते हैं, लेकिन धनिया की गंध के कारण अंदर घुसने से बचते हैं. इससे गन्ने की फसल सुरक्षित रहती है और किसानों को नुकसान नहीं झेलना पड़ता.
कम लागत में डबल फायदा
सर्दियों के मौसम में हरी धनिया की बाजार में मांग काफी ज्यादा रहती है. इसकी खेती में लागत भी कम आती है और फसल जल्दी तैयार हो जाती है. किसान गन्ने की मुख्य फसल के साथ-साथ धनिया बेचकर अतिरिक्त आमदनी कमा लेते हैं. एक ही खेत से दो फसल मिलने से खेती की लागत निकल जाती है और मुनाफा साफ दिखाई देता है. यही वजह है कि किसान इसे डबल फायदा वाली खेती मान रहे हैं.
कीट भी रहते हैं दूर, फसल रहती है स्वस्थ
सिर्फ आवारा जानवर ही नहीं, हरी धनिया गन्ने की फसल को कीटों से बचाने में भी मददगार साबित हो रही है. धनिया की गंध कई हानिकारक कीटों को खेत से दूर रखती है. इससे रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल कम होता है और फसल ज्यादा स्वस्थ रहती है. किसान बताते हैं कि इससे न केवल खर्च घटता है, बल्कि उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है.
सहफसली खेती से बढ़ रही किसानों की रुचि
खेती से जुड़े जानकारों का मानना है कि जिन किसानों के पास जमीन कम है, उनके लिए सहफसली खेती बेहद फायदेमंद है. एक ही खेत में दो फसल उगाकर किसान अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं. कृषि विभाग भी किसानों को इस तरह की खेती के लिए जागरूक कर रहा है. मौजूदा हालात में जब खेती की लागत बढ़ रही है और फसल सुरक्षा बड़ी चुनौती है, तब गन्ने के साथ हरी धनिया जैसी सहफसली खेती किसानों के लिए एक स्मार्ट समाधान बनकर उभर रही है.