गाय पालन में डोंगर गांव पंचायत ने पेश की मिसाल, 38 लाख खर्च करके बनाई अत्याधुनिक गौशाला.. रहते हैं 80 पशु

मध्य प्रदेश के डोंगर गांव पंचायत ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए एक सराहनीय पहल की है. 38 लाख रुपये की लागत से बनी आधुनिक गौशाला में पशुओं के लिए रहने, चारा-पानी और देखभाल की बेहतर व्यवस्था की गई है. इस प्रयास से गांव में सफाई सुधरी है और सड़कों पर भटकते मवेशियों की समस्या काफी हद तक कम हुई है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Jan, 2026 | 03:00 PM

Cow Shelter: आज जब शहर हो या गांव, सड़कों पर घूमते मवेशी आम समस्या बन चुके हैं. ऐसे समय में डोंगरगांव पंचायत ने एक मिसाल पेश की है. गांव की सड़कों पर भटकते निराश्रित गोवंश को सुरक्षित ठिकाना देने के लिए मध्य प्रदेश के एक गांव में 38 लाख रुपये की लागत से एक अत्याधुनिक गौशाला का निर्माण कराया है. इस गौशाला में फिलहाल 80 गोवंश का पालन किया जा रहा है, जिनकी देखभाल से लेकर चारा-पानी तक की पूरी व्यवस्था की गई है. यही वजह है कि पंचायत का यह प्रयास पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है.

38 लाख की लागत से बनी आधुनिक गौशाला

मध्य प्रदेश के डोगर गांव में पंचायत के माध्यम से बनाई गई गौशाला में गोवंश  के रहने के लिए साफ-सुथरा और सुरक्षित वातावरण तैयार किया गया है. यहां छांव की पूरी व्यवस्था है, ताकि पशु गर्मी और बारिश से सुरक्षित रह सकें. इसके साथ ही, पीने के पानी और चारे की नियमित आपूर्ति की जाती है. साफ-सफाई पर भी खास ध्यान दिया जा रहा है, जिससे पशु स्वस्थ रहें और किसी तरह की बीमारी न फैले. पंचायत का मकसद है कि निराश्रित गोवंश को बेहतर जीवन मिल सके.

बेसहारा गोवंश को मिला सुरक्षित आसरा

गांव में पहले बेसहारा गोवंश सड़कों पर घूमते  रहते थे, जिससे हादसों और गंदगी की समस्या बनी रहती थी. गौशाला बनने के बाद इन पशुओं को स्थायी ठिकाना मिल गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अब गांव की सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा नहीं दिखता, जिससे सफाई व्यवस्था भी बेहतर हुई है. साथ ही, खेतों को नुकसान पहुंचाने वाली समस्या से भी काफी हद तक राहत मिली है.

पानी, सफाई और गांव के अन्य विकास कार्य

पंचायत ने सिर्फ गौशाला ही नहीं, बल्कि गांव के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया है. जल प्रदाय के लिए ट्यूबवेल कराया गया है, जिससे नल के माध्यम से घर-घर पानी पहुंच रहा है. इससे ग्रामीणों को पानी  की समस्या काफी हद तक दूर हुई है. गांव में नियमित सफाई कराई जा रही है, नालियों का निर्माण किया गया है और बारिश के पानी की निकासी की बेहतर व्यवस्था की गई है. कीचड़ से निजात दिलाने के लिए सीसी रोड भी बनाए गए हैं.

गांव की पहचान और आगे की योजना

करीब 5 हजार की आबादी वाले इस गांव की पहचान अब सेवा और विकास कार्यों से जुड़ती जा रही है. खेती यहां आय का प्रमुख साधन है और केला व गन्ना मुख्य फसलें हैं. पंचायत का कहना है कि आगे भी गांव में स्वच्छता, पशुपालन और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाएगा. गौशाला का यह प्रयास न सिर्फ निराश्रित गोवंश के लिए वरदान साबित हो रहा है, बल्कि अन्य पंचायतों के लिए भी एक प्रेरणा बन गया है. डोंगरगांव पंचायत ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छा और सही योजना हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े और सराहनीय काम किए जा सकते हैं. यह गौशाला आज गांव की सेवा भावना और विकास सोच की पहचान बन चुकी है.

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Published: 2 Jan, 2026 | 03:00 PM

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