डेयरी खोलना हुआ आसान.. सरकार देगी 8.40 लाख रुपये तक की मदद, ब्याज में मिलेगी छूट

आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना के तहत अब पशुपालक बिना आर्थिक तंगी के खुद की डेयरी खोल सकते हैं. इस योजना में सरकार न केवल बैंक लोन दिलाने में मदद कर रही है, बल्कि भारी सब्सिडी और ब्याज में सालाना छूट भी दे रही है. यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की बड़ी पहल है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Jan, 2026 | 08:14 PM

Gau Samvardhan Yojana : अगर आप भी अपनी डेयरी शुरू करने का सपना देख रहे हैं, लेकिन पैसों की तंगी आपके कदमों को रोक रही है, तो अब खुश हो जाइए. मध्य प्रदेश सरकार की आचार्य विद्यासागर गौ संवर्धन योजना आपके इस सपने को हकीकत में बदलने के लिए तैयार है. अक्सर गांवों में हम देखते हैं कि पशुपालक मेहनत तो बहुत करते हैं, लेकिन पूंजी न होने के कारण वे बड़े स्तर पर काम नहीं कर पाते. इसी बाधा को दूर करने के लिए यह योजना एक ढाल बनकर आई है.

अब आपको बैंक के चक्कर काटने या ऊंचे ब्याज दर की चिंता करने की जरूरत नहीं है. आइए विस्तार से जानते हैं कि कैसे आप इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर में दूध की नदियां बहा सकते हैं और एक सफल डेयरी मालिक बन सकते हैं.

75 फीसदी पैसा बैंक देगा, आप बस काम शुरू करें

इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसका वित्तीय ढांचा है. कई बार पशुपालक इसलिए डरते हैं कि इतनी महंगी भैंस या गाय खरीदने  के लिए लाखों रुपये कहां से लाएंगे? योजना के अनुसार, कुल लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा बैंक ऋण (Loan) के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा. आपको केवल 25 प्रतिशत राशि ही अपने पास से लगानी होगी. इतना ही नहीं, सरकार ने ब्याज का बोझ भी आपके कंधों से हल्का कर दिया है. आपको 7 वर्षों तक 5 प्रतिशत ब्याज का अनुदान मिलेगा. यानी आपको जो ब्याज बैंक को देना होगा, उसमें सरकार आपकी मदद करेगी. यह किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है क्योंकि आमतौर पर कमर्शियल लोन पर ब्याज दरें बहुत अधिक होती हैं.

गाय हो या भैंस-हर यूनिट पर तय है बड़ी मदद

योजना को इस तरह डिजाइन किया गया है कि आप अपनी पसंद के अनुसार पशु चुन सकें. अगर आप 5 भैंसों की यूनिट शुरू करते हैं, तो इसके लिए 4 लाख 25 हजार रुपये की लागत तय की गई है. वहीं, अगर आप 5 शंकर नस्ल की गाय रखते हैं, तो 3 लाख 82 हजार रुपये और देशी गायों के लिए 2 लाख 43 हजार 750 रुपये की इकाई लागत निर्धारित है. अगर आपका इरादा थोड़ा और बड़ा है और आप 10 पशुओं के साथ काम शुरू करना चाहते हैं, तो सरकार 8 लाख 40 हजार रुपये तक की प्रोजेक्ट लागत में आपकी मदद करेगी. शर्त बस इतनी है कि आपके पास कम से कम एक एकड़ जमीन और 5 पशुओं का आधार  होना चाहिए.

आरक्षित वर्ग के लिए विशेष मार्जिन मनी का प्रावधान

सरकार ने समाज के हर वर्ग का ध्यान रखा है. सामान्य वर्ग के पशुपालकों को प्रोजेक्ट लागत का 25 प्रतिशत (अधिकतम 1.25 लाख रुपये) मार्जिन मनी के रूप में सहायता दी जाती है. लेकिन अगर आप अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से आते हैं, तो यह सहायता बढ़कर 33 प्रतिशत (अधिकतम 2 लाख रुपये) हो जाती है. यह मार्जिन मनी एक तरह की सीधी मदद है जो आपको ऋण चुकाने में बहुत बड़ी राहत देती है. पशुपालन विभाग  आपके आवेदन को बैंक भेजता है और वहां से मंजूरी मिलते ही आपके बाड़े में नए मेहमानों (पशुओं) के आने का रास्ता साफ हो जाता है.

दूध उत्पादन के साथ बढ़ेगा गांव का सम्मान

यह योजना सिर्फ पैसे देने तक सीमित नहीं है, यह पशुपालकों को आत्मनिर्भर  बनाने की एक कोशिश है. जब आपके पास उन्नत नस्ल की गायें और भैंसें होंगी, तो दूध का उत्पादन  बढ़ेगा, जिससे न सिर्फ आपकी कमाई बढ़ेगी बल्कि क्षेत्र में दूध की शुद्धता भी बनी रहेगी. सरकार हर साल अधिकतम 25 हजार रुपये तक का ब्याज अनुदान देकर यह सुनिश्चित करती है कि आप पर किस्त चुकाने का मानसिक दबाव न रहे.

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