Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज समेत कई जिलों में पशुपालन अब पूरी तरह डिजिटल होने जा रहा है. जैसे लोगों के दस्तावेज ऑनलाइन होते हैं, वैसे ही अब पशुओं का भी पूरा रिकॉर्ड इंटरनेट पर दर्ज किया जाएगा. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, जिले के करीब 6 लाख पशुओं का डाटा नेशनल डिजिटल लाइव स्टॉक मिशन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. इससे हर पशु की सेहत, टीकाकरण और मालिक की जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध होगी. इस पहल से न सिर्फ विभाग को काम में आसानी होगी, बल्कि पशुपालकों को भी योजनाओं का सीधा फायदा मिलेगा.
सेहत से लेकर टीकाकरण तक सब रहेगा दर्ज
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की ओर से जारी के मुताबिक, अब किसी पशु को कब टीका लगा, कब उसका कृत्रिम गर्भाधान हुआ या वह किसी बीमारी से ग्रस्त है या नहीं-इन सभी जानकारियों का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रहेगा. इससे समय पर इलाज और टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सकेगा. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, इस डिजिटल रिकॉर्ड से योजनाओं को जमीन पर लागू करने में तेजी आएगी. विभाग यह भी देख सकेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह की बीमारी ज्यादा फैल रही है और वहां तुरंत जरूरी कदम उठाए जा सकेंगे. सरकारी और अस्थायी गोशालाओं में संरक्षित गोवंश पर होने वाले खर्च और भुगतान की ऑनलाइन निगरानी पहले से हो रही है. अब इस व्यवस्था को और मजबूत बनाते हुए हर पशु का अलग डिजिटल प्रोफाइल तैयार किया जाएगा.
गांव-गांव होगा सर्वे, कर्मचारी करेंगे डाटा फीडिंग
इस बड़े अभियान के लिए हर गांव में एक कर्मचारी को जिम्मेदारी दी जाएगी. जिसमें कर्मचारी घर-घर जाकर पशुपालकों से जानकारी जुटाएंगे. शुरुआत में कर्मचारी पशुपालकों के घर पहुंचकर उनके पशुओं की संख्या, नस्ल, सेहत और अन्य जरूरी जानकारी इकट्ठा करेंगे. इसके बाद यह पूरा डाटा पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा. आगे चलकर जब भी पशु का टीकाकरण, उपचार या कृत्रिम गर्भाधान होगा, उसकी जानकारी भी तुरंत ऑनलाइन दर्ज की जाएगी. इससे रिकॉर्ड हमेशा अपडेट रहेगा और किसी भी जानकारी के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे.
जनपद और ब्लॉक स्तर पर होगी सख्त निगरानी
इस योजना को सफल बनाने के लिए दो स्तर पर निगरानी की व्यवस्था की गई है-जनपद और ब्लॉक स्तर पर. जनपद स्तर पर जिला प्रशासन की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जिसमें पशुपालन और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल हैं. वहीं ब्लॉक स्तर पर उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में टीम कामकाज की समीक्षा करेगी. इसमें बीडीओ, पशु चिकित्सक और पंचायत व कृषि विभाग के अधिकारी सदस्य रहेंगे. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, सर्वे अभियान पूरा होने के बाद डाटा फीडिंग का काम तेजी से शुरू किया जाएगा. नियमित मॉनिटरिंग से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी जानकारी छूट न जाए और पूरा सिस्टम सही तरीके से काम करे.
पशुपालकों को मिलेगा सीधा फायदा
इस डिजिटल पहल का सबसे बड़ा लाभ पशुपालकों को होगा. समय पर टीकाकरण, बीमारियों की पहचान और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी मिलने से उनकी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. अब पशुओं की ऑनलाइन कुंडली तैयार होने से पशुपालन विभाग की सेवाएं ज्यादा पारदर्शी और तेज होंगी. डिजिटल रिकॉर्ड से भविष्य में बीमा, सब्सिडी और अन्य योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल सकेगा. कुल मिलाकर, यह कदम प्रयागराज में पशुपालन को आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है.