तोते जैसे मुंह वाली खास बकरी बन रही पशुपालकों की पहली पसंद, कम खर्च में ज्यादा कमाई

बीटल नस्ल की बकरी पालन अब किसानों के लिए कम लागत में अच्छी कमाई का आसान जरिया बनता जा रहा है. यह बकरी दूध और मीट दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है और तेजी से बढ़ती है, जिससे पशुपालकों को नियमित आय मिलती रहती है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 14 Feb, 2026 | 07:30 PM

Goat Farming: गांवों में अक्सर कहा जाता है कि अगर कम लागत में नियमित कमाई चाहिए, तो बकरी पालन एक भरोसेमंद काम है. अब एक खास नस्ल की बकरी किसानों और पशुपालकों के लिए कमाई का मजबूत जरिया बन रही है. तोते जैसे मुंह वाली यह बकरी अपने दूध और मीट दोनों के लिए जानी जाती है. इसकी खासियत यह है कि यह कम देखभाल में भी अच्छा उत्पादन देती है और जल्दी बढ़ती है. यही वजह है कि अब कई किसान इसे व्यवसाय के रूप में अपना रहे हैं.

बीटल नस्ल की बकरी क्यों है खास

यह बकरी अपनी मजबूत बनावट और अच्छी उत्पादन क्षमता  के लिए जानी जाती है. इसका शरीर लंबा और मजबूत होता है, जबकि कान लंबे और नीचे की ओर झुके रहते हैं. सबसे अलग पहचान इसका आगे की ओर निकला हुआ मुंह है, जो इसे बाकी बकरियों से अलग बनाता है. यह नस्ल दूध और मीट दोनों के लिए उपयोगी मानी जाती है. एक स्वस्थ बकरी रोजाना करीब 2.5 से 3 लीटर दूध दे सकती है. इसकी तेज़ वृद्धि और अच्छी सेहत इसे पशुपालकों के लिए फायदेमंद बनाती है. यही कारण है कि बाजार में इस नस्ल की मांग  लगातार बढ़ रही है.

कई राज्यों में बढ़ रहा बकरी पालन

पिछले कुछ वर्षों में बकरी पालन एक छोटे काम से बड़े व्यवसाय के रूप में उभर रहा है. कई ग्रामीण इलाकों में किसान खेती के साथ-साथ बकरी पालन कर रहे हैं. इससे उन्हें नियमित आय मिल रही है और रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं. यह नस्ल अलग-अलग मौसम और परिस्थितियों में आसानी से ढल जाती है. यही वजह है कि कई राज्यों में किसान इसे सफलतापूर्वक पाल रहे हैं. कम जगह में भी इसे आसानी से रखा जा सकता है, जिससे छोटे किसानों  को भी फायदा मिलता है.

पहचान और प्रजनन क्षमता

इस नस्ल की बकरियों की पहचान उनके खास शारीरिक लक्षणों से होती है. इनका मुंह तोते जैसा दिखाई देता है और शरीर मजबूत होता है. इनकी ऊंचाई सामान्य बकरियों से थोड़ी ज्यादा होती है. प्रजनन क्षमता  के मामले में भी यह नस्ल अच्छी मानी जाती है. एक बकरी साल में कई बच्चों को जन्म दे सकती है, जिससे पशुपालकों के झुंड की संख्या जल्दी बढ़ती है. इससे कम समय में उत्पादन और आय दोनों में बढ़ोतरी होती है.

कम खर्च में ज्यादा मुनाफा

बकरी पालन  का सबसे बड़ा फायदा इसका कम खर्च है. शुरुआत में चारा और देखभाल पर थोड़ा खर्च आता है, लेकिन बाद में बकरियां खेतों में मिलने वाली घास और फसल  के अवशेषों पर भी आसानी से पल जाती हैं. एक बकरी पर महीने का खर्च लगभग कुछ सौ रुपये तक ही आता है. वहीं दूध और मीट की अच्छी मांग होने से पशुपालकों को नियमित आय मिलती रहती है. बाजार में इस नस्ल की कीमत भी अच्छी मिलती है, जिससे यह काम मुनाफे का सौदा बन जाता है. यह बकरी नस्ल कम लागत, ज्यादा उत्पादन और तेज वृद्धि के कारण पशुपालकों के लिए एक अच्छा विकल्प बन रही है. सही देखभाल और संतुलित आहार के साथ बकरी पालन किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत जरिया साबित हो सकता है.

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Published: 14 Feb, 2026 | 07:30 PM

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