Stray Cattle Scheme : खेतों में लहलहाती फसल को देखकर किसान की आंखें चमक उठती हैं, लेकिन तभी एक आवारा सांड या गाय पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है. गांवों में यह कहानी हर दूसरे घर की है. किसान रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करता है, ठंड में ठिठुरता है ताकि फसल बच सके. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि जिन आवारा पशुओं को देखकर किसान लाठी उठाता था, अब वही पशु उसकी जेब भरेंगे? जी हां, उत्तराखंड सरकार ने एक ऐसी तरकीब निकाली है जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे. अब सड़कों पर घूमने वाले ये बेसहारा जानवर आपके लिए सिरदर्द नहीं, बल्कि कमाई का साधन बनेंगे.
क्या है उत्तराखंड सरकार का मास्टर प्लान?
अक्सर आवारा पशुओं के कारण सड़कों पर हादसे होते हैं और किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं. उत्तराखंड सरकार ने इस समस्या का समाधान ग्राम गौर सेवक योजना और गौशाला योजना के रूप में निकाला है. यह योजना उन लोगों के लिए एक वरदान है जिनके पास पशुओं को रखने की जगह है लेकिन संसाधन नहीं. अब आपको सिर्फ इन बेसहारा जानवरों को अपने घर या गौशाला में आश्रय देना है, और बदले में सरकार आपको हर महीने एक निश्चित राशि देगी. यह कदम न केवल जानवरों को छत देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा.
5 पशु पालें और पाएं 12,000 रुपये
इस योजना का गणित बहुत सीधा और किसानों के हक में है. अगर कोई ग्रामीण व्यक्ति अपने पास अधिकतम पांच नर आवारा पशुओं (सांड या बैल) को पालने का जिम्मा लेता है, तो सरकार उसे प्रति पशु 80 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान करेगी. यानी एक पशु पर महीने के करीब 2400 रुपये. इस तरह अगर कोई किसान 5 पशुओं को अपने पास रखता है, तो उसे सीधे तौर पर 12,000 रुपये प्रति माह की आय होगी. सबसे अच्छी बात यह है कि इन पशुओं के बीमार होने पर आपको डॉक्टर का खर्चा नहीं उठाना होगा; पशुपालन विभाग इनका निशुल्क इलाज और स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करेगा.
संख्या की कोई सीमा नहीं, जितना सेवा उतना मेवा
अगर आपके पास ज्यादा जगह है या आप बड़े स्तर पर सामाजिक काम करना चाहते हैं, तो गौशाला योजना आपके लिए है. इस योजना के तहत पशुओं की संख्या की कोई पाबंदी नहीं है. आप अपने गौसदन में जितने भी निराश्रित पशुओं को आश्रय और भोजन देंगे, सरकार हर पशु के हिसाब से 80 रुपये रोज का खर्चा देगी. पिथौरागढ़ जैसे जिलों में तो लोग इसका लाभ उठाना शुरू भी कर चुके हैं. मुनस्यारी और बारावे जैसी जगहों पर चल रही गौशालाओं में सैकड़ों पशुओं को छत मिल रही है और संचालकों को एक अच्छी धनराशि मिल रही है.
पशुओं का सम्मान और किसानों का सुकून
यह योजना सिर्फ आंकड़ों और रुपयों का खेल नहीं है. जिन जानवरों को लोग अनुपयोगी समझकर सड़कों पर छोड़ देते थे, उन्हें अब प्रेम और सम्मान मिलेगा. किसान को अब कड़ाके की ठंड में खेत में डंडा लेकर बैठने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि वे पशु अब बाड़ों में सुरक्षित होंगे. साथ ही, इन पशुओं से मिलने वाला गोबर और मूत्र जैविक खेती के लिए खाद का काम करेगा, जिससे किसान की खेती का खर्चा भी कम होगा. यह एक ऐसी व्यवस्था है जहां सरकार, किसान और बेजुबान जानवर-तीनों का फायदा है.