Goat Farming: उत्तर प्रदेश में बकरी पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय बढ़ाने का मजबूत साधन बनता जा रहा है. खासकर महिलाओं के लिए यह कम लागत में अच्छा मुनाफा देने वाला व्यवसाय साबित हो रहा है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग की ओर से चलाए जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ अब गांव-गांव तक पहुंच रहा है. शाहजहांपुर की बकरी प्रशिक्षु गुड्डी देवी ने भी इसी प्रशिक्षण से नई तकनीकें सीखकर अपने बकरी पालन व्यवसाय को बेहतर बनाने की तैयारी की है. उनका कहना है कि पहले जानकारी की कमी के कारण बकरियों के बच्चे मर जाते थे और बीमारियों की सही पहचान नहीं हो पाती थी, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद उन्हें वैज्ञानिक तरीके से पालन की पूरी समझ मिल गई है.
पहले बीमारी से होता था नुकसान, अब मिली सही जानकारी
उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार शाहजहांपुर की गुड्डी देवी ने बताया कि पहले वह पारंपरिक तरीके से बकरियां पालती थीं, लेकिन इसमें अपेक्षित फायदा नहीं मिल पाता था. सबसे बड़ी समस्या बकरियों और उनके बच्चों में होने वाली बीमारियां थीं. कई बार बच्चों की मौत हो जाती थी, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था. उन्होंने बताया कि बकरियों के मुंह और आंख से पानी आने जैसी समस्याएं होती थीं, लेकिन बीमारी की पहचान नहीं होने से समय पर इलाज नहीं हो पाता था. जब उन्हें उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी मिली, तो उन्होंने इसमें शामिल होने का फैसला किया. यहां आने के बाद उन्हें बकरियों की आम बीमारियों, उनके लक्षण और समय पर बचाव के तरीके समझ में आए.
प्रशिक्षण में सीखा आवास, नस्ल और बच्चों की देखभाल
गुड्डी देवी ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बकरी पालन की बारीकियां बहुत आसान भाषा में समझाई गईं. सबसे पहले उन्हें यह बताया गया कि बकरियों के लिए साफ-सुथरा और हवादार आवास कितना जरूरी है. सही आवास से बीमारियों का खतरा कम होता है और बकरियों की बढ़ोतरी अच्छी होती है.
इसके अलावा प्रशिक्षकों ने उन्हें नस्ल चयन की जानकारी भी दी. किस नस्ल की बकरी कम समय में बेहतर वजन और अधिक बच्चे देती है, इसकी जानकारी मिलने से अब वह बेहतर मुनाफे की योजना बना पा रही हैं. बच्चों की देखभाल, जन्म के बाद जरूरी सावधानियां और शुरुआती दिनों में सही पोषण कैसे देना है, यह भी उन्हें विस्तार से सिखाया गया. उनका कहना है कि पहले बच्चों की देखभाल के बारे में सही जानकारी नहीं थी, इसी वजह से नुकसान होता था. अब प्रशिक्षण से यह समझ आ गया है कि सही प्रबंधन से बच्चों की मृत्यु दर कम की जा सकती है.
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— Department of AHUP (@DOAHUP) April 7, 2026
आहार, टीकाकरण और रोग बचाव की मिली नई तकनीक
प्रशिक्षण के दौरान गुड्डी देवी को यह भी बताया गया कि बकरियों को किस समय क्या खिलाना चाहिए ताकि उनकी तेजी से बढ़ोतरी हो और दूध या मांस उत्पादन बेहतर हो सके. हरा चारा, सूखा चारा, दाना मिश्रण और साफ पानी की भूमिका के बारे में विस्तार से समझाया गया. उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण जानकारी टीकाकरण को लेकर मिली. पहले उन्हें यह पता ही नहीं था कि बकरियों में भी नियमित टीके लगाए जाते हैं. प्रशिक्षण में उन्हें बताया गया कि कौन-कौन सी बीमारियों से बचाने के लिए समय पर टीकाकरण जरूरी है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग के अनुसार, समय पर टीकाकरण और साफ-सफाई से बकरियों में होने वाली गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है. इससे पशुपालकों का नुकसान कम होता है और आय में स्थिरता बनी रहती है.
महिला पशुपालकों के लिए प्रशिक्षण बना वरदान
गुड्डी देवी ने कहा कि बकरी पालन शुरू करने का विचार उनके मन में पहले से था, लेकिन जानकारी की कमी के कारण उन्होंने पहले प्रशिक्षण लेना जरूरी समझा. यही फैसला अब उनके लिए फायदेमंद साबित हो रहा है. उत्तर प्रदेश पशुपालन विभाग का मानना है कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं. कम लागत में शुरू होने वाला बकरी पालन अब महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत साधन बन रहा है. इस प्रशिक्षण से उन्हें वैज्ञानिक तरीके से बकरी पालन की पूरी जानकारी मिली है. अब वह इसे बेहतर तरीके से अपनाकर आगे अच्छा लाभ लेने की उम्मीद कर रही हैं. शाहजहांपूर जैसे जिलों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल पशुपालकों की आय बढ़ा रहे हैं, बल्कि महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहे हैं.