यूपी की 23 चीनी मिलों को 24 करोड़ जारी, एक मिल में 10 लाख टन से ज्यादा पेराई से किसानों को मिला फायदा

Cooperative Sector: उत्तर प्रदेश की 23 सहकारी चीनी मिलें लगातार सुचारु रूप से चल रही हैं, जिससे गन्ना किसानों को बड़ी राहत मिली है. सरकार मरम्मत, मशीनों के अपग्रेड और क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है. इससे पेराई तेज होगी, भुगतान बेहतर रहेगा और ग्रामीण रोजगार के साथ किसानों की आय को भी मजबूत सहारा मिलेगा.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 30 Mar, 2026 | 02:34 PM

UP Sugar Mills: उत्तर प्रदेश में गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है. प्रदेश की 23 सहकारी चीनी मिलें इस समय सुचारु रूप से चल रही हैं, जिससे गन्ना पेराई और भुगतान की व्यवस्था मजबूत बनी हुई है. केंद्र सरकार और राज्य सरकार दोनों मिलकर इन मिलों के रखरखाव, मरम्मत और आधुनिकीकरण पर जोर दे रही हैं. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने लोकसभा में लिखित जवाब में बताया कि मिलों का उत्पादन स्थिर है और इनके मशीनों को नया और बेहतर बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

23 सहकारी मिलें लगातार चल रहीं, किसानों को मिल रही राहत

प्रदेश में चल रही 23 सहकारी चीनी मिलें गन्ना किसानों  के लिए बड़ी राहत बनी हुई हैं. इन मिलों के चलते किसानों का गन्ना समय पर खरीदा जा रहा है और भुगतान व्यवस्था भी बेहतर हुई है. बरेली के सेमीखेड़ा और बदायूं के शेखूपुर जैसी प्रमुख मिलें बेहतर तरीके से काम कर रही हैं. सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, बदायूं यूनिट ने 2025-26 सीजन में 10.46 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई की, जो मजबूत संचालन का संकेत है. सहकारी मिलों के चलते छोटे किसानों को निजी मिलों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता और उन्हें स्थानीय स्तर पर सुविधा मिल जाती है.

मरम्मत और अपग्रेड के लिए सरकार का पूरा सपोर्ट

राज्य सरकार ने 2024-25 के ऑफ-सीजन में इन मिलों की मरम्मत और मशीनों के रखरखाव  के लिए 24 करोड़ रुपये का बजट दिया. इससे सीजन शुरू होने से पहले मशीनों की सर्विस, बॉयलर, क्रशिंग यूनिट और अन्य जरूरी सिस्टम को दुरुस्त किया गया. इसका सीधा फायदा यह हुआ कि पेराई सीजन में मिलों का काम बिना रुकावट चलता रहा. सरकार का फोकस सिर्फ पुराने सिस्टम को चलाने पर नहीं, बल्कि उन्हें नई तकनीक से मजबूत बनाने पर भी है, ताकि रिकवरी बढ़े और किसानों को जल्दी भुगतान मिल सके.

सेमीखेड़ा मिल की क्षमता बढ़ाने की तैयारी

सहकारिता मंत्रालय के अनुसार, राज्य सरकार अब सेमीखेड़ा मिल की क्षमता बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है. इसके साथ ही एक नई रिफाइनरी आधारित चीनी मिल स्थापित  करने की तैयारी भी बताई जा रही है. इससे गन्ने की पेराई क्षमता बढ़ेगी, उत्पादन तेज होगा और आसपास के किसानों को अपना गन्ना बेचने के ज्यादा विकल्प मिलेंगे. नई तकनीक वाली मिलों से चीनी के साथ-साथ एथेनॉल और अन्य सह-उत्पाद बनाने की संभावना भी मजबूत होगी. इससे किसानों की आय और सहकारी क्षेत्र दोनों को मजबूती मिलेगी.

NCDC की बड़ी फंडिंग से सहकारी क्षेत्र को मजबूती

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम  (NCDC) ने उत्तर प्रदेश में 7,700 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि कई अलग-अलग सहकारी परियोजनाओं में दी है. इसमें चीनी मिलों के साथ डेयरी, भंडारण, प्रसंस्करण और दूसरे ग्रामीण क्षेत्रों का विकास भी शामिल है. NCDC की यह फंडिंग सहकारी संस्थाओं को आर्थिक मजबूती देने में बड़ी भूमिका निभा रही है. हालांकि, फिलहाल इन 23 सहकारी चीनी मिलों के लिए किसी विशेष अतिरिक्त वित्तीय सहायता का अलग प्रस्ताव केंद्र को नहीं भेजा गया है. उत्तर प्रदेश की 23 सहकारी चीनी मिलें सिर्फ चीनी उत्पादन का केंद्र नहीं, बल्कि किसानों की आय, समय पर भुगतान और ग्रामीण रोजगार का मजबूत आधार बन रही हैं. सरकार का आधुनिकीकरण और क्षमता बढ़ाने पर फोकस आने वाले समय में गन्ना किसानों के लिए और ज्यादा फायदे का रास्ता खोल सकता है.

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