बारिश से आलू और टमाटर की फसल पर खतरे की घंटी, किसानों को हो सकता है नुकसान

पंजाब में बारिश से गेहूं की फसल को राहत मिली, खेतों में नमी बढ़ी और सिंचाई की जरूरत कम हुई. आलू और टमाटर की फसल में हल्की चिंता है. देर से बोई गई गेहूं किस्में गर्मी से प्रभावित थीं, लेकिन बारिश और तापमान गिरावट ने बढ़वार के लिए अनुकूल माहौल बनाया.

Kisan India
नोएडा | Published: 24 Jan, 2026 | 06:32 PM

Punjab News: पंजाब में हो रही बारिश से गेहूं किसानों ने राहत की सांस ली है, लेकिन अन्य फसलों के ऊपर गंभीर खतरा मंडरा रहा है. जानकारों का कहना है कि बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ी है और फसलों की सेहत बेहतर हुई है, लेकिन आलू और टमाटर की फसल उगाने वाले किसानों में कुछ चिंता भी देखने को मिल रही है. बारिश के साथ तेज हवाएं भी चलीं, जिससे फसल को नुकसान होने का डर था. कृषि विशेषज्ञों ने कहा कि अभी नुकसान का अंदाजा लगाना जल्दी होगा, और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, पाटियाला के उप निदेशक (हॉर्टिकल्चर) संदीप सिंह ग्रेवाल ने कहा कि बारिश ज्यादातर फलदार फसलों के लिए फायदेमंद रही, लेकिन आलू की फसल के लिए कुछ चुनौती बन सकती है. पहले से मौसम चेतावनी के कारण अधिकांश आलू की फसल कटाई के लिए तैयार थी. वर्तमान बारिश से फसल को नुकसान नहीं होगा, लेकिन कटाई में देरी हो सकती है. उन्होंने कहा कि टमाटर अभी अंकुरण के चरण में हैं और उन पर असर नहीं पड़ेगा. अगर टमाटर टनलिंग पद्धति या ऊंचे बेड पर उगाए गए हैं, तो बारिश से कोई नुकसान नहीं होगा.

दिन के तापमान में अचानक वृद्धि गेहूं के लिए अनुकूल नहीं थी

मुख्य कृषि अधिकारी पाटियाला जसविंदर सिंह ने कहा कि यह बारिश लंबे समय से प्रतीक्षित थी, क्योंकि दिसंबर और जनवरी में मौसम ज्यादातर सूखा रहा. इस समय की बारिश फसलों के लिए लाभदायक है. दिन के तापमान में अचानक वृद्धि  गेहूं के लिए अनुकूल नहीं थी. उन्होंने कहा कि अब बारिश और तापमान में गिरावट से मिट्टी में जरूरी नमी आएगी और फसलों के बढ़ने के लिए अनुकूल माहौल बनेगा.

पछेती गेहूं की बुवाई करने वाले किसान भी खुश

वहीं, यह बारिश गेहूं की फसल के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. इस समय गेहूं की फसल  बढ़वार के चरण में है, और हल्की बारिश से खेतों में नमी बनी रहेगी, जिससे सिंचाई की जरूरत कम होगी. किसानों का कहना है कि इससे उत्पादन बढ़ने की संभावना है और फसल की गुणवत्ता भी बेहतर होगी. किसानों का मानना है कि अगर हल्की और नियंत्रित बारिश इसी तरह बनी रही, तो रबी की फसलों को काफी फायदा होगा. हालांकि, हाल के हफ्तों में 20°C से ज्यादा तापमान से देर से बोई गई किस्में प्रभावित हुई थीं, लेकिन बारिश के बाद औसत तापमान 15°C से नीचे आ गया, जो बढ़वार के लिए आदर्श है. ऐसे में पछेती गेहूं की बुवाई करने वाले किसान भी खुश हैं.

 

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Published: 24 Jan, 2026 | 06:32 PM

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