अचानक बारिश में पशु हो रहे बीमार, जानिए कैसे रखें देखभाल ताकि दूध और कमाई दोनों सुरक्षित रहें

बेमौसम बारिश का असर सिर्फ फसलों पर नहीं, पशुओं की सेहत पर भी तेजी से पड़ता है. नमी, कीचड़ और तापमान में बदलाव से पशुओं में बुखार, खांसी, खुरपका और दस्त जैसी बीमारियां बढ़ सकती हैं. सही समय पर साफ-सफाई, सूखा बिछावन, अच्छा चारा और टीकाकरण से बड़ा नुकसान टाला जा सकता है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Apr, 2026 | 11:30 PM

Animal Health: बेमौसम बारिश किसानों के लिए सिर्फ फसल की चिंता नहीं बढ़ाती, बल्कि पशुओं की सेहत पर भी बड़ा असर डालती है. अचानक मौसम बदलने से ठंडक, नमी और गंदगी तेजी से बढ़ जाती है, जिससे पशुओं में बुखार, खांसी, खुरपका-मुंहपका, दस्त और त्वचा रोग जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं. अगर समय रहते पशुशाला की सफाई, सूखा बिछावन, संतुलित आहार और टीकाकरण पर ध्यान दिया जाए, तो इस नुकसान से आसानी से बचा जा सकता है. केंद्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान के पशु विशेषज्ञ डॉ वाई के सोनी के अनुसार, ऐसे मौसम में थोड़ी सी सावधानी पशुओं की जान बचा सकती है और पशुपालकों की कमाई भी सुरक्षित रख सकती है.

बेमौसम बारिश में क्यों बढ़ता है बीमारी का खतरा

जब अचानक बारिश होती है तो तापमान तेजी से बदलता है. दिन में गर्मी और रात में ठंडक बढ़ने से पशुओं की रोगों  से लड़ने की क्षमता कमजोर होने लगती है. इसके साथ ही पशुशाला के आसपास नमी और कीचड़ जमा हो जाता है, जहां बैक्टीरिया और वायरस बहुत तेजी से फैलते हैं. ऐसे मौसम में पशुओं को सर्दी-जुकाम, बुखार, निमोनिया, दस्त, खुर और मुंह की बीमारी, त्वचा पर फंगल इंफेक्शन और पैर सड़ने जैसी परेशानियां हो सकती हैं. अगर पशु ज्यादा देर तक गीली जगह पर बंधे रहें, तो संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है. यही वजह है कि अचानक होने वाली बारिश में पशुपालकों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है.

पशुशाला को सूखा रखना ही सबसे बड़ा बचाव

विशेषज्ञ का कहना है कि बेमौसम बारिश में सबसे जरूरी है कि पशु जहां बंधे हों वहां पानी जमा न होने पाए. फर्श पर सूखा भूसा, लकड़ी का बुरादा  या रेत जरूर बिछाएं, ताकि नमी कम रहे और पशु आराम से बैठ सकें. गोबर और गंदगी को रोजाना साफ करें. पशुशाला की छत से पानी टपक रहा हो तो उसे तुरंत ठीक करवाएं. जहां पानी भरता हो वहां निकासी का रास्ता बनाएं. अचानक बारिश में मक्खी और मच्छर भी बढ़ जाते हैं, इसलिए समय-समय पर दवा का छिड़काव करना जरूरी है. अगर पशुशाला सूखी और साफ रहेगी तो आधी बीमारियां अपने आप दूर रहेंगी. थोड़ी सी लापरवाही से पूरा झुंड बीमारी की चपेट में आ सकता है.

चारा और पानी में न करें गलती

बेमौसम बारिश के दौरान सबसे बड़ी गलती कई पशुपालक गीला या फफूंदी लगा चारा  खिलाने की कर देते हैं. इससे पशुओं को पेट की बीमारी, गैस, दस्त और दूध उत्पादन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. पशुओं को हमेशा सूखा और ताजा चारा दें. हरा चारा अगर बारिश में भीग गया हो तो उसे तुरंत न खिलाएं. पहले हल्का सुखाकर दें. दाना और भूसा ऐसी जगह रखें जहां नमी न पहुंचे. पीने का पानी भी साफ होना चाहिए. बारिश के कारण कई बार पानी में गंदगी मिल जाती है, जिससे दस्त और बुखार का खतरा बढ़ जाता है. साफ पानी के साथ मिनरल मिक्सचर और नमक देने से पशुओं की ताकत बनी रहती है.

बीमारी के लक्षण दिखें तो तुरंत करें ये काम

अगर अचानक बारिश के बाद पशु खाना कम कर दे, मुंह से लार गिरने लगे, पैर में सूजन दिखे, तेज बुखार आए, खांसी हो या बार-बार बैठा रहे, तो इसे नजरअंदाज बिल्कुल न करें. सबसे पहले बीमार पशु को दूसरे पशुओं से अलग रखें. उसके मुंह और पैरों को हल्के एंटीसेप्टिक घोल से साफ करें. अगर सर्दी या बुखार लगे तो उसे सूखी और गर्म जगह पर रखें. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ऐसे मौसम में खुरपका-मुंहपका और अन्य मौसमी बीमारियों के टीके समय पर जरूर लगवाएं. हर छह महीने में वैक्सीनेशन और डॉक्टर की सलाह से दवा देने से बड़ा नुकसान टल सकता है.

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Published: 8 Apr, 2026 | 11:30 PM
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