Stubble Management : जिस पराली को अब तक खेतों में आग लगाकर नष्ट कर दिया जाता था, वही पराली अब किसानों और पशुपालकों के लिए किसी खजाने से कम नहीं है. सर्दियों में जब हरे चारे की कमी हो जाती है, तब यही पराली पशुओं के लिए पोषण का सहारा बन रही है. सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए तो पराली न सिर्फ चारे की समस्या हल करती है, बल्कि खेती और पर्यावरण-दोनों को फायदा पहुंचाती है.
पशुओं के लिए पौष्टिक चारा बन सकती है पराली
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सर्दी के मौसम में कई इलाकों में किसान धान की पराली का इस्तेमाल पशुओं के चारे के रूप में कर रहे हैं. पराली में फाइबर की मात्रा अच्छी होती है, जो पशुओं के पाचन तंत्र को मजबूत बनाती है. हालांकि कच्ची पराली में प्रोटीन कम होता है, इसलिए वैज्ञानिक तरीके से इसका उपचार जरूरी माना जाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, पराली में लगभग 4 प्रतिशत यूरिया मिलाकर उपचार करने से उसका पोषण स्तर बढ़ जाता है. इससे पराली ज्यादा पौष्टिक बनती है और पशुओं की सेहत पर अच्छा असर डालती है.
पराली से बनाएं साइलेज, चारे की कमी होगी दूर
पराली को लंबे समय तक उपयोग में लाने के लिए इससे साइलेज भी तैयार किया जा सकता है. साइलेज एक तरह का सुरक्षित चारा होता है, जिसे हवा बंद करके रखा जाता है. यह तरीका खासतौर पर तब काम आता है, जब हरे चारे की भारी कमी हो. पराली का साइलेज बनाकर किसान पूरे साल पशुओं को चारा उपलब्ध करा सकते हैं. इससे बाजार से महंगा चारा खरीदने की जरूरत भी कम हो जाती है और खर्च में बचत होती है.
पशुओं के बिछावन से बनेगी जैविक खाद
पराली का एक और फायदेमंद उपयोग पशुओं के रहने की जगह पर बिछावन के रूप में किया जा सकता है. जब पशु इस पर बैठते या लेटते हैं, तो पराली धीरे-धीरे गोबर और मूत्र के साथ मिलकर सड़ जाती है. कुछ समय बाद यही पराली बेहतरीन जैविक खाद में बदल जाती है. इस खाद को खेतों में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जमीन की सेहत सुधरती है और फसलों की पैदावार बेहतर होती है.
पराली जलाने की बजाय अपनाएं सही तरीका
हर साल पराली जलाने से न सिर्फ मिट्टी की ताकत कम होती है, बल्कि हवा भी जहरीली हो जाती है. इससे लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है और पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है. अगर किसान पराली को जलाने की बजाय चारा, साइलेज या जैविक खाद के रूप में इस्तेमाल करें, तो यह समस्या ही खत्म हो सकती है. इससे पशुपालन मजबूत होगा, खेती सस्ती पड़ेगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा.