नक्सल इलाके में किसान की किस्मत बदली, आधुनिक खेती से कमाए लाखों रुपये, गांव में बने मिसाल

Success Story: नक्सल प्रभावित इलाके में एक किसान ने आधुनिक खेती अपनाकर अपनी जिंदगी बदल दी है. पहले सीमित आय में संघर्ष करने वाले किसान अब कई फसलों और पशुपालन से लाखों रुपये कमा रहे हैं. सरकारी योजनाओं और नई तकनीक की मदद से उनकी आमदनी बढ़ी है और गांव के दूसरे किसान भी प्रेरित हो रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 May, 2026 | 11:35 AM

Success Story: रायपुर, छत्तीसगढ़ में एक नक्सल प्रभावित गांव से एक ऐसी सफलता की कहानी सामने आई है जिसने पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए नई उम्मीद जगा दी है. यहां के किसान गोपाल एर्रागोला (Gopal Erragola) ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद आधुनिक और वैज्ञानिक खेती अपनाकर अपनी जिंदगी बदल दी है. कभी सिर्फ बारिश पर निर्भर रहने वाले गोपाल आज बहुफसली खेती, पशुपालन और मछली पालन से लाखों रुपये की आय कमा रहे हैं. उनकी यह सफलता अब पूरे गांव के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

कठिन हालात से शुरू हुआ खेती का सफर

गोपाल का गांव फुतकेल, रायपुर क्षेत्र के नक्सल प्रभावित इलाके  में आता है, जहां पहले खेती करना आसान नहीं था. शुरुआती दिनों में वे केवल वर्षा आधारित धान की खेती करते थे, जिससे आय बहुत कम होती थी और जीवन मुश्किलों से भरा रहता था. लेकिन समय के साथ कृषि विभाग के अधिकारियों ने उनके खेत का निरीक्षण किया और पाया कि उनका खेत तालपेरू नदी के किनारे है, जो सिंचाई और व्यावसायिक खेती के लिए काफी उपयुक्त है. इसके बाद प्रशासन की मदद से वहां बिजली और सिंचाई की सुविधा विकसित की गई. इस बदलाव ने उनकी खेती की दिशा ही बदल दी.

आधुनिक खेती और सरकारी योजनाओं का बड़ा सहारा

सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद गोपाल एर्रागोला ने कृषि विभाग और आत्मा योजना  के अधिकारियों की मदद से आधुनिक खेती शुरू की. उन्हें उन्नत बीज, तकनीकी जानकारी और खेत प्रबंधन की ट्रेनिंग दी गई. इसके बाद उन्होंने फसल चक्र अपनाया और धान के साथ मक्का, मूंगफली और मिर्च जैसी नकदी फसलों की खेती शुरू की. विशेष रूप से मिर्च की खेती से उन्हें अच्छी आय मिलने लगी. इसके साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड, शाकम्भरी योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और माइक्रो इरीगेशन जैसी योजनाओं का लाभ भी मिला. इन योजनाओं से उन्हें बीज, खाद, सिंचाई उपकरण और आर्थिक सहायता प्राप्त हुई.

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नक्सल क्षेत्र में किसान ने खेती से बदली अपनी जिंदगी.

प्राकृतिक खेती से कम लागत और ज्यादा मुनाफा

गोपाल को राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के क्लस्टर में भी शामिल किया गया. इसके तहत उन्होंने एक एकड़ भूमि में प्राकृतिक खेती अपनाई. इसमें जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और ब्रह्मास्त्र जैसे जैविक उपायों का इस्तेमाल किया गया. इससे खेती की लागत कम हुई और जमीन की उर्वरता भी बढ़ी. फसलों की गुणवत्ता  में सुधार हुआ और उत्पादन भी बेहतर मिला. प्राकृतिक खेती ने उन्हें स्थायी और सुरक्षित खेती की ओर बढ़ने का रास्ता दिखाया.

खेती के साथ पशुपालन और मछली पालन से बढ़ी आमदनी

अब गोपाल सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं हैं. उन्होंने पशुपालन और मछली पालन  भी शुरू किया है. इससे उनकी आय कई गुना बढ़ गई है. धान, मक्का, मूंगफली, मिर्च, सब्जी उत्पादन, पशुपालन और मछली पालन से उन्हें कुल मिलाकर लगभग 3 लाख 93 हजार 750 रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है. यह आय पहले की तुलना में कई गुना अधिक है, जिससे उनका जीवन स्तर बेहतर हुआ है.

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किसान ने आधुनिक खेती से लाखों रुपये की कमाई बढ़ाई.

गांव के लिए बनी प्रेरणा की मिसाल

आज गोपाल एर्रागोला की सफलता को देखकर गांव के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं. पहले जहां लोग सिर्फ पारंपरिक खेती तक सीमित थे, अब वे भी आधुनिक तकनीक और सरकारी योजनाओं  की ओर बढ़ रहे हैं. कृषि विभाग के सहयोग और मेहनत के कारण यह इलाका अब धीरे-धीरे विकास की ओर बढ़ रहा है. गोपाल की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन, सरकारी सहायता और मेहनत से किसी भी कठिन इलाके में भी समृद्धि लाई जा सकती है.

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