Farming Tips: अगर किसान कम लागत में ज्यादा कमाई का कोई भरोसेमंद तरीका ढूंढ रहे हैं, तो फरवरी महीने में तरबूज की खेती उनके लिए बेहतरीन विकल्प बन सकती है. गर्मियों में तरबूज की मांग हर जगह बहुत ज्यादा रहती है. शहरों से लेकर गांव तक, शादी-ब्याह, ठेले, होटल और जूस सेंटर हर जगह तरबूज की बिक्री होती है. यही वजह है कि सही समय पर की गई तरबूज की खेती किसानों को लाखों की कमाई करा सकती है.
कई अनुभवी किसान बताते हैं कि अगर फरवरी के पहले या दूसरे हफ्ते में तरबूज की बुवाई कर दी जाए, तो मार्च-अप्रैल में फसल तैयार हो जाती है. इसके बाद मई-जून की तेज गर्मी में जब मांग सबसे ज्यादा होती है, तब किसान अपनी फसल बाजार में बेचकर 4 से 5 लाख रुपये तक की कमाई कर सकते हैं. खास बात यह है कि इसमें कुल खर्च करीब 25 से 30 हजार रुपये के आसपास ही आता है.
फरवरी में तरबूज की खेती क्यों है फायदेमंद
फरवरी में लगाई गई तरबूज की फसल को अगेती फसल माना जाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि जब बाकी किसान तरबूज बाजार में लाते हैं, उससे पहले ही आपकी फसल बिकने लगती है. शुरुआती दिनों में तरबूज का दाम काफी अच्छा मिलता है. इस समय बाजार में आवक कम और मांग ज्यादा होती है, जिससे किसानों को सीधा फायदा होता है.
इसके अलावा फरवरी का मौसम तरबूज की बेल बढ़ने के लिए अनुकूल होता है. न ज्यादा ठंड होती है और न ही ज्यादा गर्मी. ऐसे में पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और फल भी बढ़िया आकार के आते हैं.
तरबूज की खेती के लिए सही मिट्टी का चुनाव
तरबूज की अच्छी पैदावार के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. मिट्टी का पीएच मान 6 से 6.5 के बीच होना चाहिए. अगर मिट्टी ज्यादा भारी या जलभराव वाली होगी, तो जड़ों में सड़न की समस्या आ सकती है.
खेत की तैयारी करते समय अच्छी तरह जुताई कर लें और मिट्टी को भुरभुरी बना लें. इसके बाद 3 से 4 फीट चौड़े बेड तैयार करें, ताकि पानी निकासी सही बनी रहे.
खाद और उर्वरक का सही इस्तेमाल
एक एकड़ खेत में 7 से 8 टन अच्छी तरह सड़ी हुई पुरानी गोबर की खाद जरूर मिलाएं. इससे मिट्टी की ताकत बढ़ती है और पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. खेत तैयार करते समय खाद को मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए, ताकि बेल बढ़ने के दौरान पौधों को पूरा पोषण मिल सके.
उन्नत और हाइब्रिड किस्मों का चयन
अच्छी पैदावार और ज्यादा मुनाफे के लिए उन्नत हाइब्रिड किस्मों का चयन करना बहुत जरूरी है. हाइब्रिड किस्मों में फल एकसमान, वजनदार और बाजार में पसंद किए जाने वाले होते हैं. इससे बिक्री में कोई दिक्कत नहीं आती और दाम भी अच्छे मिलते हैं.
सिंचाई और मल्चिंग का महत्व
तरबूज की खेती में ड्रिप सिंचाई सबसे बेहतर मानी जाती है. ड्रिप से पानी सीधे जड़ों तक पहुंचता है, जिससे पानी की बचत होती है और पौधे स्वस्थ रहते हैं. इसके साथ ही खेत में प्लास्टिक मल्चिंग लगाने से मिट्टी में नमी बनी रहती है और खरपतवार भी नहीं उगते.
सिंचाई करते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि पानी सीधे फलों पर न पड़े. जब फल पकने लगें, उस समय पानी बहुत कम कर दें. ज्यादा पानी देने से फल फट सकते हैं और मिठास भी कम हो जाती है.
कीट और रोग से कैसे बचाएं फसल
तरबूज की फसल में सफेद मक्खी और माहू जैसे कीटों का खतरा रहता है. अगर खेत में इन कीटों का असर दिखे, तो समय पर 5 से 6 बार उचित कीटनाशक का छिड़काव करें. इससे फल खराब होने से बचते हैं और उत्पादन सुरक्षित रहता है.
सही समय पर बिक्री से मिलेगा ज्यादा मुनाफा
फरवरी में बोई गई तरबूज की फसल अप्रैल के अंत या मई की शुरुआत में बाजार में आ जाती है. यही वह समय होता है जब गर्मी बढ़ने लगती है और तरबूज की मांग तेजी से बढ़ती है. जो किसान इस समय बाजार तक अपनी फसल पहुंचा देते हैं, उन्हें सबसे ज्यादा मुनाफा मिलता है.