पराली से सड़क तक नई क्रांति, कृषि मंत्री शिवराज सिंह बोले- किसान की कमाई बढ़ाएगी बायो बिटुमेन तकनीक

पराली, जो अब तक किसानों के लिए परेशानी और प्रदूषण की वजह बनती थी, अब कमाई का नया जरिया बनने जा रही है. नई तकनीक से इसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में होगा, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी, पराली जलाने की घटनाएं घटेंगी और पर्यावरण को राहत मिलेगी. यह पहल आत्मनिर्भर भारत को भी मजबूती देगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 30 Mar, 2026 | 06:35 PM

Stubble Management: खेतों में बची पराली अब सिर्फ धुआं और प्रदूषण की वजह नहीं बनेगी, बल्कि यही पराली अब देश की सड़कों पर विकास की नई रफ्तार देगी. राजधानी दिल्ली में आयोजित एक बड़े प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पराली से बायो-बिटुमेन बनाकर सड़क निर्माण की ऐतिहासिक पहल को देश के लिए बड़ा कदम बताया. उन्होंने कहा कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण बचाने, आयात घटाने और आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी.

महावीर जयंती पर शिवराज सिंह चौहान का अहिंसा संदेश

कार्यक्रम में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान  ने भगवान महावीर को नमन करते हुए कहा कि आज दुनिया को युद्ध नहीं, अहिंसा के रास्ते की जरूरत है. उन्होंने पराली जलाने को भी प्रकृति के खिलाफ बताया और कहा कि इससे खेतों में रहने वाले छोटे जीव-जंतु और मिट्टी के उपयोगी सूक्ष्म जीव नष्ट हो जाते हैं. उनका कहना था कि पराली जलाने की जगह उससे कमाई का रास्ता निकालना ही सही समाधान है.

अब पराली नहीं जलेगी, किसानों की बनेगी कमाई

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले गांवों में पराली का इस्तेमाल पशुओं के चारे, छप्पर और दूसरे घरेलू कामों में होता था, लेकिन अब समय की कमी के कारण किसान इसे जला देते हैं. नई बायो-बिटुमेन तकनीक से यही पराली अब सड़क निर्माण में इस्तेमाल होगी. इससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी मिलेगी और पराली जलाने की समस्या भी कम होगी. आसान शब्दों में कहें तो अब खेत का बचा अवशेष भी किसानों के लिए पैसा कमाने का जरिया बनेगा.

आयात घटेगा, आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी ताकत

शिवराज सिंह चौहान ने जोर देकर कहा कि बायो-बिटुमेन तकनीक से बिटुमेन के आयात पर होने वाला बड़ा खर्च कम होगा. इससे देश को हर साल हजारों करोड़ रुपये की बचत हो सकती है. उन्होंने इसे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत राह बताते हुए कहा कि अब सड़क निर्माण में स्वदेशी तकनीक  की हिस्सेदारी बढ़ेगी और वेस्ट टू वेल्थ का सपना तेजी से पूरा होगा.

विज्ञान, किसान और सड़क निर्माण का शानदार संगम

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि यह सिर्फ टेक्नोलॉजी ट्रांसफर  नहीं, बल्कि खेत, किसान और विज्ञान का शानदार गठबंधन है. पराली से सड़क, बायो-फ्यूल और दूसरे उपयोगी उत्पाद बनाने की दिशा में यह बड़ी सफलता है. इससे न सिर्फ प्रदूषण घटेगा, बल्कि किसानों की आय, सड़क निर्माण और देश की आत्मनिर्भरता-तीनों को मजबूती मिलेगी.

जय किसान, जय विज्ञान का नया मॉडल

इसके साथ ही कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह पहल देश के लिए नया मॉडल बनेगी, जहां खेत का अवशेष भी विकास की सड़क तैयार करेगा. इससे किसानों को नया बाजार मिलेगा, पर्यावरण सुरक्षित रहेगा और देश की सड़कें भी ज्यादा मजबूत बनेंगी. उन्होंने इसे विकसित भारत की नई पहचान बताया, जहां किसान, विज्ञान और तकनीक  मिलकर भविष्य की राह तैयार करेंगे.

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Published: 30 Mar, 2026 | 06:27 PM
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