ठंड के मौसम में तालाब में पानी डालने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, वरना होगा बड़ा नुकसान

ठंड का मौसम मछली पालकों के लिए सावधानी का समय होता है. तालाब के पानी में अचानक बदलाव मछलियों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है. इसी को देखते हुए बिहार सरकार के मत्स्य निदेशालय ने सर्दी में मछलियों के सही प्रबंधन को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 2 Feb, 2026 | 09:01 PM

Fish Farming: सर्दी का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, मछलियों के लिए भी चुनौती लेकर आता है. ठंड बढ़ते ही तालाब का पानी ठंडा हो जाता है, जिससे मछलियों की बढ़वार, भूख और सेहत पर सीधा असर पड़ता है. कई बार छोटी-सी लापरवाही से भारी नुकसान हो जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत मत्स्य निदेशालय ने ठंड के मौसम में मछलियों के सही प्रबंधन को लेकर जरूरी सलाह जारी की है. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें, तो सर्दी में भी मछली पालन सुरक्षित और लाभकारी बना रह सकता है.

ठंड में क्यों जरूरी है मछलियों का खास ख्याल

ठंड के मौसम में पानी का तापमान गिरते ही मछलियों की गतिविधि  कम हो जाती है. वे कम चारा खाती हैं और कमजोर भी जल्दी पड़ सकती हैं. ऐसे समय में तालाब के पानी में अचानक बदलाव मछलियों के लिए खतरे की घंटी बन सकता है. कई बार किसान जल्दी में ठंडा पानी तालाब में भर देते हैं, जिससे मछलियों को झटका लगता है और मौत तक हो सकती है. इसलिए सर्दियों में सामान्य से ज्यादा सावधानी जरूरी होती है.

तालाब में पानी डालते समय बरतें ये सावधानी

बिहार मत्स्य निदेशालय के अनुसार ठंड के मौसम में बहुत ठंडा पानी सीधे तालाब में नहीं डालना चाहिए. अगर नलकूप या नदी से पानी लिया जा रहा है, तो उसे पहले कुछ समय तक खुला छोड़ देना चाहिए. इससे पानी का तापमान थोड़ा सामान्य हो जाता है. इसके बाद उसी पानी को धीरे-धीरे तालाब में मिलाना चाहिए. अचानक ठंडा पानी डालने से तालाब का तापमान तेजी से गिरता है, जो मछलियों के लिए नुकसानदायक होता है.

जल स्रोत का सही उपयोग ही बचाएगा नुकसान से

सर्दियों में जल स्रोत का सही इस्तेमाल बहुत जरूरी है. अगर संभव हो, तो सुबह या दोपहर के समय ही पानी डालें, जब वातावरण थोड़ा गर्म हो. शाम या रात में पानी डालने से बचें, क्योंकि उस समय ठंड ज्यादा होती है. इसके अलावा तालाब के पानी का स्तर भी संतुलित रखें. बहुत कम पानी में ठंड का असर ज्यादा होता है, जिससे मछलियां जल्दी बीमार  पड़ सकती हैं.

थोड़ी समझदारी, मछली पालन में बड़ी बचत

सरकार की ये सलाह छोटी लग सकती है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है. सही समय पर, सही तरीके से पानी का प्रबंधन करने से मछलियों की मौत  रुकती है और उत्पादन भी बना रहता है. मत्स्य निदेशालय का कहना है कि किसान अगर ठंड के मौसम में धैर्य और समझदारी से काम लें, तो नुकसान से बचा जा सकता है. कुल मिलाकर, सर्दी में मछली पालन का मंत्र यही है- जल्दबाजी नहीं, समझदारी से प्रबंधन. इससे मछलियां भी स्वस्थ रहेंगी और किसानों की कमाई भी सुरक्षित रहेगी.

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Published: 2 Feb, 2026 | 09:01 PM

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