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Dairy Farming Guide: कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये 3 गलतियां? जानें भैंस का दूध बढ़ाने के आसान तरीके
Milk Production Hike Tips: अक्सर पशुपालक परेशान रहते हैं कि अच्छी खुराक के बावजूद भैंस का दूध क्यों कम हो गया है. इसके पीछे नजर लगना नहीं, बल्कि पानी की कमी, पेट के कीड़े और कैल्शियम जैसी तीन बुनियादी गलतियां हो सकती हैं. इन आदतों को सुधारकर और पशु से स्नेहपूर्ण व्यवहार कर आप दूध का उत्पादन आसानी से बढ़ा सकते हैं.
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खेती के साथ भैंस पालन बढ़ा रहा कमाई, दो भैंस खरीद पर 2.5 लाख तक फायदा, किसान ऐसे करें अप्लाई
खेती के साथ अब पशुपालन भी किसानों की आमदनी बढ़ाने का मजबूत जरिया बन रहा है. भैंस पालन के लिए बिहार सरकार खास योजना चला रही है, जिसमें लोन और सब्सिडी की सुविधा दी जा रही है. सही जानकारी, ट्रेनिंग और समय पर आवेदन करने से ग्रामीण पशुपालक इस योजना का लाभ उठाकर नियमित कमाई कर सकते हैं.
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खेती के साथ पशुपालन क्यों बन रहा किसानों की पहली पसंद, जानिए मुनाफे का पूरा गणित यहां
खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का भरोसेमंद साधन बन रहा है. मुर्गीपालन, भेड़पालन और गौपालन में बाजार की मांग लगातार बढ़ रही है. सही देखभाल, कम लागत और बेहतर प्रबंधन से किसान हर महीने अच्छी कमाई कर सकते हैं और खेती को भी मजबूत बना सकते हैं.
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केरल में दूध उत्पादन क्यों बन गया घाटे का सौदा? प्रियंका गांधी ने सरकार से की ये बड़ी मांग
प्रियंका गांधी ने पशुपालन और डेयरी विकास मंत्री को लिखे पत्र में साफ तौर पर कहा है कि चारे की बढ़ती कीमतें डेयरी किसानों की कमर तोड़ रही हैं. उनके मुताबिक, कुछ अध्ययनों में यह सामने आया है कि दूध उत्पादन की कुल लागत का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा केवल पशु आहार पर ही खर्च हो जाता है.
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नोट छापने की मशीन है जाफराबादी भैंस! कम खर्चे में भरपूर दूध और मोटा मुनाफा, आज ही लाएं घर
Jafrabadi Buffalo: अगर आप भी पशुपालन से अपनी किस्मत बदलना चाहते हैं, तो जाफराबादी भैंस एक शानदार विकल्प है. अपनी विशाल कद-काठी और रोजाना इतना लीटर तक दूध देने की क्षमता रखती है जिसके कारण इसे बाहुबली कहा जाता है. कम रखरखाव और ऊंचे वसा वाले दूध की वजह से यह नस्ल देशभर के किसानों के बीच खूब लोकप्रिय हो रही है.
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दूध ही सब कुछ नहीं… क्यों आज भी गोबर और खेतों की ताकत पर भरोसा करते हैं देश के पशुपालक
गांव में गोबर को कभी बेकार नहीं समझा जाता. यही बात इस अध्ययन में भी सामने आई. करीब 74 प्रतिशत पशुपालक गोबर को बहुत अहम मानते हैं. कहीं इससे खेतों में खाद बनती है, कहीं चूल्हे जलते हैं और कहीं गोबर बेचकर थोड़ी अतिरिक्त आमदनी हो जाती है.








