कम पूंजी में शुरू करें खुद का डेयरी बिजनेस.. सरकार देगी बंपर सब्सिडी, जानें कैसे सीधे खाते में आएगा पैसा

छत्तीसगढ़ सरकार की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का नया जरिया बन गई है. दो दुधारू पशुओं की डेयरी यूनिट पर 66.6 फीसदी तक की भारी सब्सिडी देकर सरकार पशुपालकों को आत्मनिर्भर बना रही है. खेती के साथ दूध बेचने से होने वाली नियमित कमाई ग्रामीणों के जीवन स्तर और पोषण में बड़ा सुधार ला रही है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 12 Jan, 2026 | 08:00 PM

Chhattisgarh Dairy Scheme : छत्तीसगढ़ के गांवों में सुबह की पहली किरण जब खेत की मेड़ पर पड़ती है, तो साथ में सुनाई देती है दुधारू मवेशियों के गले में बंधी घंटियों की आवाज. यहां के किसान के लिए खेती सिर्फ धंधा नहीं, बल्कि उसकी जीवन रेखा है. लेकिन आज के महंगाई के दौर में सिर्फ फसल के भरोसे घर चलाना थोड़ा मुश्किल होता जा रहा है. इसी मुश्किल को आसान बनाने और किसानों के चेहरों पर मुस्कान लाने के लिए राज्य सरकार की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना एक वरदान साबित हो रही है. यह सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि उन हाथों को मजबूती देने का जरिया है जो मिट्टी से सोना उगाते हैं.

कम लागत में अपना छोटा डेयरी फार्म

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अक्सर छोटे किसान  इस बात से डरते हैं कि डेयरी फार्म खोलने के लिए लाखों रुपये और बहुत सारी जमीन चाहिए होगी. लेकिन यह योजना इसी डर को खत्म करती है. योजना के तहत किसान केवल दो उन्नत नस्ल की गाय या भैंस पालकर अपना काम शुरू कर सकते हैं. इसकी कुल लागत 1.40 लाख रुपये तय की गई है. पशुधन विकास विभाग के के अनुसार इस छोटी शुरुआत से भी किसान एक सम्मानजनक और नियमित आय की ओर कदम बढ़ा सकता है.

सरकार दे रही है बड़ा सहारा

इस योजना की सबसे खास बात इसकी भारी-भरकम सब्सिडी है. सरकार मानती है कि अगर किसान को शुरुआती धक्का (Support) मिल जाए, तो वह खुद अपनी तरक्की का रास्ता बना लेगा. सामान्य वर्ग के किसानों के लिए 50 फीसदी यानी सीधे 70 हजार रुपये की मदद दी जा रही है. SC/ST (अनुसूचित जाति और जनजाति) वर्ग के भाइयों-बहनों के लिए तो यह खुशी और भी बड़ी है, उन्हें लागत का 66.6 फीसदी हिस्सा अनुदान के रूप में मिलता है. इसका मतलब है कि जेब से बहुत कम पैसे लगाकर आप दो दुधारू पशुओं  के मालिक बन सकते हैं.

बैंक के चक्करों से आजादी, सीधा खाते में पैसा

अक्सर सरकारी योजनाओं  के नाम पर किसानों को कागजी कार्रवाई और दफ्तरों के चक्कर काटने का डर सताता है. लेकिन यहां प्रक्रिया को पानी की तरह साफ और सरल रखा गया है. अगर आपके पास अपनी जमा-पूंजी है, तो आप खुद पशु खरीदकर बिल और बैंक डिटेल विभाग को दे सकते हैं. वेरिफिकेशन होते ही अनुदान की राशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा कर दी जाती है. इससे बिचौलियों का डर खत्म हो गया है और पारदर्शिता बढ़ी है.

खेती के साथ रोज की कमाई का जुगाड़

खेती में पैसा फसल कटने  के बाद यानी महीनों के इंतजार के बाद आता है. लेकिन डेयरी एक ऐसा काम है जो आपको रोज की कमाई (Daily Cash) देता है. सुबह-शाम दूध बेचकर जो पैसे मिलते हैं, उससे न केवल घर का खर्च चलता है, बल्कि बच्चों की स्कूल फीस और खाद-बीज का इंतजाम भी आसानी से हो जाता है. यह योजना किसानों को साहूकारों के कर्ज के जाल से निकालकर आत्मनिर्भर बना रही है.

सेहतमंद बचपन और मजबूत गांव

इस योजना का असर सिर्फ जेब पर ही नहीं, बल्कि सेहत पर भी पड़ रहा है. जब गांव में दूध का उत्पादन बढ़ेगा, तो घर के बच्चों को भी भरपूर पोषण मिलेगा. शुद्ध दूध और उससे होने वाली कमाई ग्रामीण अर्थव्यवस्था  की रीढ़ को मजबूत कर रही है. विभाग का मानना है कि इस योजना से छत्तीसगढ़ के गांव अब सिर्फ अन्नदाता ही नहीं, बल्कि दुग्धदाता के रूप में भी नई पहचान बना रहे हैं.

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Published: 12 Jan, 2026 | 08:00 PM

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