Bater Farming: बटेर फार्मिंग कैसे करें.. पक्षी पालन से कमाई बढ़ाएं, जानिए पूरा तरीका

बटेर फार्मिंग किसानों के लिए कम लागत में जल्दी कमाई का नया रास्ता बन रही है. कम जगह, कम जोखिम और तेज उत्पादन इसकी सबसे बड़ी खासियत है. सिर्फ 35-40 दिनों में तैयार होने वाला बटेर आज खेती के साथ आय बढ़ाने का भरोसेमंद विकल्प बन चुका है. ऐसे में आइए जानते हैं कि बटेर पालन से कैसे अच्छा कमाई कर सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 9 Jan, 2026 | 12:45 PM

Bater Farming : खेत की मेड़ पर खड़ा किसान आज केवल आसमान की ओर नहीं देख रहा, बल्कि अपनी मेहनत को नई दिशा देने की उपाय खोज रहा है. वह जानता है कि जब मौसम साथ न दे और लागत कमर तोड़ दे, तो उसे अपनी हिम्मत और सूझबूझ से नया रास्ता बनाना होगा. बटेर पालन एक ऐसा ही रास्ता है, जो कम मेहनत और छोटे निवेश में एक किसान को उद्यमी बनने का हौसला देता है.

बटेर फार्मिंग क्या है और कैसे करें शुरुआत

बटेर फार्मिंग  बस एक पक्षी पालने का काम नहीं, बल्कि उम्मीदों की एक नई फसल है. बटेर, जो कभी जंगलों और झाड़ियों की शोभा हुआ करते थे, आज किसानों के घर का सहारा बन रहे हैं. यह व्यवसाय मुर्गी पालन  जैसा ही है, लेकिन इसमें सब्र का फल बहुत जल्दी मिलता है. जहां फसलों को तैयार होने में महीनों लगते हैं, वहीं बटेर सिर्फ 35 से 40 दिन में आपको कमाई देने के लिए तैयार हो जाते हैं. यह उन किसानों के लिए एक बड़ी राहत है जिन्हें हर महीने घर खर्च और बच्चों की स्कूल फीस की चिंता सताती है.

Bater Farming, Quail Farming, Farmer Income, what is Bater farming, how to earn Bater farming

बटेर पालन से बदली किसानों की किस्मत, कम खर्च में तेज कमाई.

कम जगह, कम जोखिम

गांव के उन छोटे घरों और तंग जगहों में जहां बड़ी डेयरी खोलना  नामुमकिन है, वहां बटेर एक वरदान बनकर आए हैं. एक छोटे से कमरे या बरामदे के कोने में भी सैकड़ों बटेर पाले जा सकते हैं. इनकी सबसे अच्छी बात इनकी मजबूत इम्यूनिटी है. मुर्गियों की तरह ये जल्दी बीमारियों की चपेट में नहीं आते, जिससे किसान का रातों का सुकून और दिन का पैसा-दोनों सुरक्षित रहता है. यह काम इतना सहज है कि घर की महिलाएं और बड़े-बुजुर्ग भी हाथ बंटा सकते हैं, जिससे पूरा परिवार एक इकाई बनकर प्रगति की ओर बढ़ता है.

कैसे रखें पहला कदम?

Bater Farming, Quail Farming, Farmer Income, what is Bater farming, how to earn Bater farming

लकड़ी या लोहे की जाली से पिंजरे बनवाये.

बटेर पालन शुरू करने के लिए आपको किसी आलीशान बंगले की नहीं, बस एक सुरक्षित छत की जरूरत है. लकड़ी या लोहे की जाली से बने छोटे पिंजरे इनके लिए काफी हैं. बस ध्यान यह रखना है कि ये नन्हे परिंदे ऊंची छलांग लगाने में माहिर होते हैं, इसलिए इनका घर बंद और सुरक्षित होना चाहिए. शुरुआती दिनों में इन्हें 35 डिग्री सेल्सियस की गर्माहट  देनी होती है, बिल्कुल वैसी ही ममता जैसी एक मां अपने बच्चों को देती है. एक बार जब वे इस गर्माहट में ढल जाते हैं, तो फिर वे तेजी से बढ़ने लगते हैं.

देखभाल और पोषण

बटेर को पालना किसी छोटे बच्चे की देखभाल करने जैसा है. इनके दाने में प्रोटीन का सही संतुलन (20-24 फीसदी) होना चाहिए, ताकि इनका विकास तेजी से हो. मक्का, सोयाबीन और घर की ताजी हरी पत्तियां इन्हें वह पोषण देती हैं जिससे इनका मांस और अंडे गुणी बनते हैं. अंडे उत्पादन के लिए नर और मादा का सही तालमेल (1:3) रखना जरूरी है. जब 6-7 हफ्तों बाद आंगन में बटेर के अंडों की भरमार होती है, तो किसान की आंखों में आने वाली चमक उसकी पूरी थकान मिटा देती है.

बाजार की मांग और खुशहाली का गणित

आज का दौर हेल्थ का है. जिम जाने वाले युवाओं से लेकर सेहत के प्रति जागरूक परिवारों तक, हर कोई बटेर के कम फैट वाले मांस और पौष्टिक अंडों की तलाश में है. मात्र 3000-4000 रुपये के छोटे निवेश से शुरू हुआ यह सफर, 40 दिनों के भीतर 10 से 12 हजार रुपये की कमाई तक पहुंच सकता है. होटलों और आयुर्वेदिक केंद्रों में इसकी मांग ने इसे एक प्रीमियम प्रोडक्ट बना दिया है. यह सिर्फ मुनाफा नहीं है, यह एक किसान का गौरव  है कि वह समाज को एक सेहतमंद विकल्प दे रहा है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है