खेती के साथ पशुपालन क्यों बन रहा किसानों की पहली पसंद, जानिए मुनाफे का पूरा गणित यहां

खेती के साथ पशुपालन किसानों के लिए अतिरिक्त आमदनी का भरोसेमंद साधन बन रहा है. मुर्गीपालन, भेड़पालन और गौपालन में बाजार की मांग लगातार बढ़ रही है. सही देखभाल, कम लागत और बेहतर प्रबंधन से किसान हर महीने अच्छी कमाई कर सकते हैं और खेती को भी मजबूत बना सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 25 Jan, 2026 | 05:52 PM

 Animal Husbandry  : आज के समय में किसान सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर संतुष्ट कमाई नहीं कर पा रहे हैं. खाद, बीज और मजदूरी का खर्च लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में किसान अब उन कामों की ओर बढ़ रहे हैं, जिनसे खेत में मौजूद संसाधनों का पूरा इस्तेमाल हो और आमदनी भी बढ़े. खेती के साथ पशुपालन इसी सोच का नतीजा है. खेत का भूसा, हरा चारा और गोबर-सब मिलकर पशुपालन को किसानों के लिए फायदे का सौदा बना रहे हैं.

खेती के साथ पशुपालन क्यों है फायदेमंद

पशुपालन किसानों  के लिए इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इसके लिए अलग से बहुत ज्यादा इंतजाम नहीं करने पड़ते. खेतों में फसल कटने के बाद जो अवशेष बचते हैं, वही पशुओं के चारे के काम आ जाते हैं. पशुओं से मिलने वाला गोबर खेतों में खाद बनकर पैदावार बढ़ाता है. इससे रासायनिक खाद  पर होने वाला खर्च भी कम हो जाता है. यही वजह है कि आज ज्यादातर किसान खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर चल रहे हैं.

मुर्गीपालन- कम लागत, जल्दी मुनाफा

मुर्गीपालन आज किसानों के बीच सबसे तेजी से बढ़ने वाला व्यवसाय बन गया है. मुर्गी से अंडा और मांस  दोनों मिलता है, जिनकी बाजार में हमेशा मांग रहती है. ब्रॉयलर मुर्गियों का वजन जल्दी बढ़ता है, इसलिए इन्हें कम समय में बेचकर पैसा कमाया जा सकता है. अगर लागत की बात करें तो एक चूजे पर करीब 30 से 45 रुपये खर्च आते हैं. सही देखभाल के बाद एक किलो वजन का मुर्गा 70 से 90 रुपये में बिक जाता है. इस तरह एक मुर्गे से करीब 25 से 40 रुपये का मुनाफा हो सकता है. अगर किसान 1000 मुर्गियों का पालन  करें, तो सालाना 3 से 4 लाख रुपये तक की कमाई संभव है.

भेड़पालन- ऊन, दूध और मांस से तिहरी कमाई

भेड़पालन भी किसानों  के लिए अच्छा विकल्प है. भेड़ से ऊन, दूध और मांस-तीनों से कमाई होती है. ऊन से बने कपड़ों की बाजार में अच्छी मांग रहती है. भेड़ ज्यादा खर्चीली नहीं होती, लेकिन साफ वातावरण और अच्छा चारा जरूरी है. एक भेड़ पर हर महीने करीब 500 से 600 रुपये का खर्च आता है. बदले में ऊन से करीब 40 रुपये, दूध से 1500 रुपये और मांस से 800 रुपये तक की आमदनी हो सकती है. इस तरह एक भेड़ से औसतन 1700 रुपये से ज्यादा का मुनाफा संभव है. अगर किसान 30 भेड़ पालते हैं, तो हर महीने 30 से 40 हजार रुपये तक कमा सकते हैं.

गौपालन- दूध के दम पर स्थायी आमदनी

गौपालन किसानों का सबसे पुराना और भरोसेमंद व्यवसाय है. दूध, दही, पनीर  और घी की मांग साल भर रहती है. अच्छी नस्ल की गाय और सही देखभाल से रोजाना तय कमाई होती है. एक गाय पर हर महीने करीब 4000 से 5000 रुपये खर्च आते हैं. अगर गाय रोजाना औसतन 8 लीटर दूध देती है, तो महीने की कमाई 10 से 12 हजार रुपये तक हो सकती है. इसमें से 5 से 7 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा बचता है. अगर किसान 3-4 गाय पालें, तो हर महीने 20 से 25 हजार रुपये की आमदनी संभव है.

सही योजना से बढ़ेगा मुनाफा

पशुपालन में सफलता के लिए सही योजना बहुत जरूरी है. बाजार की मांग देखकर पशु का चुनाव करें, समय पर टीकाकरण  और इलाज कराएं और खर्च का पूरा हिसाब रखें. सरकार की कई योजनाएं और सब्सिडी भी पशुपालकों को आर्थिक मदद देती हैं. खेती के साथ पशुपालन जोड़ने से किसान की आय बढ़ती है और जोखिम भी कम होता है.

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