कहीं जमीन का हक, तो कहीं बीजों में लूट.. मुश्किलों में घिरा किसान, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान

ग्रेटर नोएडा और हरियाणा के किसान इन दिनों दोहरी मार झेल रहे हैं. एक ओर नोएडा में जमीन के प्लॉट और आबादी निस्तारण का मुद्दा लटका हुआ है, तो दूसरी ओर हरियाणा में महंगे बीजों के नाम पर भारी वसूली का आरोप लगा है. इन समस्याओं के हल न होने पर किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 16 Jan, 2026 | 06:00 AM

Farmer Protest News : खेतों की मिट्टी से सोना उगाने वाला किसान आज अपनों और बेगानों, दोनों की बेरुखी से परेशान है. एक तरफ दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा में किसान अपनी ही पुश्तैनी जमीन के हक के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, तो दूसरी तरफ हरियाणा के सिरसा में उन्हें बीज के नाम पर खुलेआम ठगा जा रहा है. ये सिर्फ दो अलग-अलग राज्यों की खबरें नहीं हैं, बल्कि उन किसानों का दर्द है जो दिन-रात हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं, लेकिन जब उनके अधिकारों की बात आती है, तो सिस्टम अक्सर बहरा हो जाता है. चाहे वह जमीन के प्लॉट का मामला हो या महंगे बीजों की लूट, किसानों ने अब साफ कह दिया है-अब बातें बहुत हो चुकीं, अब फैसला सड़क पर होगा.

ग्रेटर नोएडा में फूटा गुस्सा

ग्रेटर नोएडा के ईटेडा गांव में हाल ही में भारी हलचल देखने को मिली. किसान सभा के बैनर तले जुटी भारी भीड़ ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के खिलाफ हुंकार भरी. किसानों का सीधा आरोप  है कि प्राधिकरण उनके 10 प्रतिशत प्लॉट और नए भूमि कानून को लागू करने में जानबूझकर देरी कर रहा है. पंचायत में मौजूद बुजुर्ग किसानों  की आंखों में गुस्सा साफ झलक रहा था. उनका कहना है कि दशकों से वे अपनी समस्याओं का समाधान ढूंढ रहे हैं, लेकिन अधिकारी सिर्फ तारीख पर तारीख दे रहे हैं.

अधिकारियों की गैरमौजूदगी और अधूरा फैसला

किसानों की नाराजगी की एक बड़ी वजह 9 जनवरी को होने वाली बैठक का नाकाम होना भी है. नियम के अनुसार, आबादी के मामलों को सुलझाने के लिए एक कमेटी को फैसला लेना था, जिसमें पुलिस और प्रशासन के बड़े अधिकारियों को शामिल होना था. लेकिन आरोप है कि पुलिस कमिश्नर के प्रतिनिधि सूचना के बावजूद वहां नहीं पहुंचे. इस ढिलाई ने किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किसान सभा के जिलाध्यक्ष डॉ. रुपेश वर्मा ने साफ कहा कि अगर 23 जनवरी की अगली बैठक में भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो प्राधिकरण के गेट पर ताला जड़ने वाला आंदोलन शुरू होगा.

हरियाणा में बीजों का ब्लैक होल- 25 गुना ज्यादा वसूली

इधर नोएडा में जमीन का मुद्दा गर्माया है, तो उधर हरियाणा के सिरसा में किसानों  के साथ एक अजीबोगरीब लूट का खुलासा हुआ है. भारतीय किसान एकता (BKE) ने आरोप लगाया है कि हाइब्रिड धान के बीज बेचने वाली कंपनियां किसानों से 25 गुना ज्यादा दाम वसूल रही हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि जिस धान को सरकार एमएसपी  (MSP) पर भी ढंग से नहीं खरीदती, उसी धान को कंपनियां मामूली प्रोसेसिंग के बाद 600 रुपये प्रति किलो के हिसाब से किसानों को वापस बेच रही हैं.

करोड़ों का बीज घोटाला और सरकारी चुप्पी

किसान नेता लखविंदर सिंह औलख ने गणित समझाते हुए बताया कि पिछले साल करीब 1800 एमटी हाइब्रिड धान का बीज 108 करोड़ रुपये में बेचा गया. अगर इसी धान को सामान्य फसल के तौर पर देखा जाए, तो इसकी कीमत महज 4.30 करोड़ रुपये होती. यानी कंपनी ने किसानों का ही अनाज  उन्हें बीज के नाम पर 25 गुना मुनाफे के साथ वापस कर दिया. इतना ही नहीं, बाजार में इन बीजों की कालाबाजारी भी चरम पर है और डीलर एमआरपी से ऊपर पैसे मांग रहे हैं.

मुख्यमंत्री को पत्र और आंदोलन की अंतिम चेतावनी

हरियाणा और यूपी, दोनों ही जगहों के किसानों ने अब अपनी उम्मीदें मुख्यमंत्री की चौखट पर टिका दी हैं. सिरसा के किसानों ने मुख्यमंत्री नायब सैनी और कृषि मंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि बीज कंपनियों  की मनमानी पर अंकुश लगाया जाए और सरकारी बीज केंद्रों पर सस्ती दरों पर हाइब्रिड बीज उपलब्ध कराए जाएं. किसानों का कहना है कि अगर सरकार ने मॉनिटरिंग कमेटी नहीं बनाई और कालाबाजारी नहीं रुकी, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करेंगे.

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Published: 16 Jan, 2026 | 06:00 AM

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