Wheat Farming: पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सहित लगभग पूरे देश में गेहूं की बुवाई पूरी हो गई है. कई किसान तो गेहूं की पहली और दूसरी सिंचाई कर रहे हैं. लेकिन बिहार में कई किसान धान कटाई करने के बाद गेहूं की बुवाई करने की तैयारी ही कर रहे हैं. ऐसे में ये किसान फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि वे गेहूं की कौन सी किस्म की बुवाई करें, जिससे कम समय में अधिक पैदावार हो. लेकिन अब ऐसे किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. क्योंकि आज हम गेहूं की कुछ उन्नत किस्मों के बारे में बात करने जा रहा हैं, जिसकी बुवाई करने पर किसानों को एक हेक्टेयर में 60 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है.
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सहित देश की कई राज्यों में कुछ किसान किसी वजह से गेहूं नहीं बो पाए हैं और परेशान हैं. ऐसे किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है. कृषि विशेषज्ञों ने कुछ ऐसी गेहूं की किस्में बताई हैं, जिन्हें दिसंबर के आखिरी तक बोया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, जो किसान अभी तक गेहूं की बुवाई नहीं कर पाए हैं, वे देर से बोई जाने वाली किस्मों में से एक DBW 187 की खेती कर सकते हैं. इसे करण वंदना के नाम से जाना जाता है. यह किस्म 120-125 दिनों में तैयार हो जाती है और एक हेक्टेयर में 60 क्विंटल तक उपज देती है.
28 दिसंबर तक किसान कर सकते हैं बुवाई
इसके अलावा PBW 752 भी एक ऐसी किस्म है, जिसे 28 दिसंबर तक बोया जा सकता है. इसमें गर्मी सहने की क्षमता ज्यादा है, इसलिए इसे देर से भी बोया जा सकता है. PBW 373 भी गेहूं की ऐसी किस्म है, जिसे दिसंबर के आखिरी दिनों तक बोया जा सकता है. इसे बोने के 125 दिनों में तैयार किया जा सकता है. बिहार के किसान इसे आसानी से उगा सकते हैं. यह किस्म बहुत खास है. इसे बोने के 100-105 दिन में पककर तैयार किया जा सकता है. इसकी पैदावार भी अच्छी होती है. एक हेक्टेयर में 47 क्विंटल तक गेहूं मिल सकता है. बिहार के किसान इसे दिसंबर के आखिरी तक बो सकते हैं.
इतने दिन पर करें पहली सिंचाई
कृषि जानकारों का कहना है कि गेहूं की पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 25 दिन बाद की जाती है. पहली सिंचाई के साथ संतुलित मात्रा में उर्वरक देने से पौधों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन भी अच्छा होगा. आमतौर पर गेहूं की 4 से 5 बार सिंचाई की जाती है और इसे मिट्टी और मौसम के अनुसार किया जाता है.