January Livestock Care: जैसे ही जनवरी का महीना आता है, ठंड अपने पूरे असर में नजर आने लगती है. इस समय न सिर्फ इंसानों को बल्कि गाय, भैंस, बकरी, मुर्गी और मछलियों को भी खास देखभाल की जरूरत होती है. ठंडी हवा, गिरता तापमान और कोहरा पशुओं की सेहत, दूध उत्पादन और प्रजनन क्षमता पर सीधा असर डालता है. अगर जनवरी में थोड़ी सी लापरवाही हो जाए, तो बीमारी, दूध में गिरावट और नुकसान तय माना जाता है. इसी वजह से जानकारों की सलाह है कि इस महीने पशुपालक सही खानपान, साफ-सफाई और प्रबंधन पर खास ध्यान दें.
डेयरी पशुओं की देखभाल
जनवरी में दुधारू पशुओं को संतुलित आहार देना सबसे ज्यादा जरूरी होता है. ठंड के कारण पशुओं को ज्यादा ऊर्जा की जरूरत पड़ती है. गाय और भैंस के आहार में कैल्शियम, फॉस्फोरस और मैग्नीशियम युक्त खनिज मिश्रण जरूर शामिल करें. इससे दूध उत्पादन बना रहता है और पशु कमजोर नहीं पड़ते. गर्भवती और दूध देने वाले पशुओं को दिन में धूप में जरूर बैठने दें. रात के समय पशु शेड में सूखा भूसा या पुआल बिछाएं ताकि ठंड जमीन से न लगे. गीले भूसे को तुरंत हटाकर खाद में डाल दें. शेड में हवा के निकलने का सही इंतजाम रखें, लेकिन ठंडी हवा सीधे पशु पर न लगे.
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भेड़ और बकरी पालन
जनवरी का महीना भेड़ और बकरी पालन के लिए काफी अहम होता है. इस समय सही पोषण देने से आगे चलकर अच्छे प्रजनन और स्वस्थ बच्चों की संभावना बढ़ जाती है. प्रजनन से पहले भेड़-बकरियों को दलहनी चारा, दाना, खनिज मिश्रण और विटामिन जरूर दें. एक साल से ज्यादा उम्र की बकरी और बकरों को रोज 250 से 500 ग्राम संतुलित आहार देना फायदेमंद रहता है. इससे उनकी ताकत बढ़ती है और शरीर प्रजनन के लिए तैयार रहता है. ठंड में खुले में ज्यादा देर न रखें और रात में सूखी जगह पर बांधें.
मुर्गी पालन
जनवरी में मुर्गी पालन करने वालों को पानी और तापमान पर खास ध्यान देना चाहिए. ठंड में अगर पानी गंदा हो जाए तो बीमारियां तेजी से फैलती हैं. मुर्गियों को हमेशा साफ और हल्का गुनगुना पानी दें. अंडा देने वाली मुर्गियों की फीड में 5 प्रतिशत शेल ग्रिट मिलाएं, इससे अंडे का उत्पादन बेहतर होता है. छोटे चूजों को पहले महीने में लगभग 32 डिग्री तापमान चाहिए. इसके लिए ब्रूडर या बल्ब की सही व्यवस्था रखें. चूजों को उम्र के हिसाब से पर्याप्त रोशनी देना भी जरूरी है.
खरगोश, सूअर और मछली पालन
जनवरी का मौसम खरगोश पालन के लिए भी अनुकूल माना जाता है. इस समय साफ-सफाई और सही आहार से अच्छे बच्चे मिलते हैं. सूअर पालन में शेड की पूरी सफाई रखें और फर्श पर पुआल बिछाएं. छोटे पिगलेट्स को ठंड से बचाने के लिए बल्ब से गर्मी दें. मछली पालकों के लिए सलाह है कि तालाब में ऑक्सीजन का सही स्तर बनाए रखें. जनवरी के अंत में मछलियों को धीरे-धीरे दाना देना शुरू करें. मछली के बच्चों को रोज उनके वजन का 3 से 5 प्रतिशत आहार देना फायदेमंद होता है.
कृमिनाशन और ओस लगी घास से बचाव है बेहद जरूरी
जनवरी में पशुओं में पेट के कीड़े और चमड़ी से जुड़ी समस्याएं ज्यादा देखी जाती हैं. भेड़, बकरी और गाय को समय पर कृमिनाशक दवा दें. टिक और माइट्स से बचाव के लिए पशुओं और गौशाला में दवा का छिड़काव करें. सबसे जरूरी बात यह है कि सुबह-सुबह ओस लगी घास पर पशुओं को चराने न ले जाएं. गीली घास से पेट की बीमारी और अफारा हो सकता है. हमेशा धूप निकलने के बाद ही चराई कराएं.