Uttar Pradesh MSP News: उत्तर प्रदेश में दलहन, तिलहन की खरीदी शुरू होने से पहले मंडियों में सारी तैयारी कर ली गई है. कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि किसानों को इस बार खरीदी और भुगतान में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा कि सरकार का पूरा ध्यान इस बात पर है कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले, फसल की खरीद समय पर हो और भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में पहुंचे. साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य में खाद की प्रयाप्त उपलब्धता है. किसानों को खाद को लेकर कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है.
गेहूं के साथ दलहन-तिलहन खरीद पर बड़ा फोकस
उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बार सिर्फ गेहूं ही नहीं, बल्कि दलहन और तिलहन पर भी बड़ा जोर दिया है. उन्होंने बताया कि केंद्र से MSP खरीद के लिए अतिरिक्त छूट मिलने के बाद राज्य में गेहूं खरीद तेजी से कराई जाएगी. हाल ही में गेहूं का MSP बढ़ाकर 2,585 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है और खरीद केंद्र भी बड़े स्तर पर बनाए गए हैं. उन्होंने कहा कि इस बार यूपी में मसूर की 6.77 लाख मीट्रिक टन, चने की 2.24 लाख मीट्रिक टन और सरसों की 5.30 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का मानना है कि MSP किसानों के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है, जिससे उन्हें बाजार में कम भाव का नुकसान नहीं उठाना पड़ता.
MSP बढ़ा, किसानों को मिलेगा ज्यादा फायदा
इस बार दलहन और तिलहन उगाने वाले किसानों के लिए MSP में बढ़ोतरी सबसे बड़ी राहत बनकर आई है.
- चना MSP:- 5,875 रुपये प्रति क्विंटल (पिछले साल से 225 रुपये ज्यादा)
- मसूर MSP:- 7,000 रुपये प्रति क्विंटल (300 रुपये की बढ़ोतरी)
- सरसों MSP:- 6,200 रुपये प्रति क्विंटल (250 रुपये ज्यादा)
यह बढ़ी हुई कीमत किसानों को सीधे बेहतर कमाई का मौका देगी. खास बात यह है कि भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में किया जाएगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी. खरीद के लिए NAFED और NCCF जैसी केंद्रीय एजेंसियों के साथ राज्य की एजेंसियां भी जुड़ेंगी. सरकार की एजेंसियों में पीसीएफ, यूपीएसएस समेत 4 एजेंसियां खरीद प्रक्रिया संभालेंगी, ताकि किसानों को अपने जिले में ही सुविधा मिल सके.
खाद को लेकर बड़ी राहत, पर्याप्त स्टॉक मौजूद
रबी और जायद दोनों सीजन को देखते हुए खाद की उपलब्धता पर भी सरकार ने बड़ा अपडेट दिया. प्रेस वार्ता में साफ कहा गया कि यूरिया, DAP, NPK, SSP, MOP और पोटाश पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है. किसानों को खाद के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा. सरकार के मुताबिक कोऑपरेटिव सेक्टर को करीब 3.95 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया है, ताकि गांव स्तर तक सप्लाई सुचारु बनी रहे. यही नहीं, प्रति हेक्टेयर DAP और यूरिया का संतुलित उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है, जिससे लागत कम हो और उत्पादन बेहतर मिले. ये संदेश खास तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि कई बार सीजन के बीच खाद की कमी किसानों की चिंता बढ़ा देती है. इस बार सरकार पहले से तैयारी के साथ मैदान में दिख रही है.
जायद फसल, पार्क और किसान हित की बड़ी तस्वीर
प्रेस वार्ता में सिर्फ खरीद और खाद की बात नहीं हुई, बल्कि किसानों से जुड़ी लंबी रणनीति की झलक भी दिखी. सरकार ने कहा कि जायद की फसलों को भी पूरा सहयोग और समर्थन दिया जाएगा, ताकि किसान सालभर खेती से बेहतर कमाई कर सकें. इसके साथ ही भारत रत्न चौधरी चरण सिंह पार्क बनाने की योजना का भी जिक्र हुआ, जिसे किसानों की विरासत और सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है. यह संदेश साफ है कि सरकार खेती को सिर्फ उत्पादन नहीं, बल्कि किसान सम्मान और आय बढ़ाने के बड़े मिशन के रूप में देख रही है.