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केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी कितने रुपये तय किया है?

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पिछले Quiz का सही जवाब
पुंगनूर नस्ल
विजेताओं के नाम
सुभाष चंद्र गुप्ता- किसनपुर, अमेठी, उत्तर प्रदेश
मदर डेयरी ने पार किया 20,000 करोड़ का आंकड़ा, अब हर राज्य में पकड़ मजबूत करने की तैयारी

मदर डेयरी ने पार किया 20,000 करोड़ का आंकड़ा, अब हर राज्य में पकड़ मजबूत करने की तैयारी

मदर डेयरी अब सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी पहले ही 16 राज्यों में अपनी मौजूदगी बना चुकी है और अब उसका फोकस पूरे देश में अपनी पकड़ मजबूत करने पर है. इस समय कंपनी के उत्पाद करीब 4 लाख दुकानों तक पहुंच रहे हैं, जिसे बढ़ाकर 5 लाख तक ले जाने की योजना है.

मंडियों में 94 लाख टन गेहूं की आवक.. खातों में पहुंचेंगे 19976 करोड़ रुपये.. भुगतान को मंजूरी

25 अप्रैल की शाम तक कुल उठाव 29,02,220 मीट्रिक टन तक पहुंच गया. उस दिन 4,70,377 मीट्रिक टन गेहूं का उठाव हुआ, जो पिछले दिन के 4,45,334 मीट्रिक टन से ज्यादा था. 72 घंटे के नियम के अनुसार अभी 38,17,420 मीट्रिक टन गेहूं नहीं उठाया गया है, जबकि कुल मिलाकर 60,68,213 मीट्रिक टन गेहूं अभी भी मंडियों में पड़ा हुआ है.

यहां लगता है सबसे बड़ा ट्रैक्टर बाजार, किसानों को सीधे सस्ते दामों पर मिलता है ट्रैक्टर

यहां लगता है सबसे बड़ा ट्रैक्टर बाजार, किसानों को सीधे सस्ते दामों पर मिलता है ट्रैक्टर

इस बाजार में किसानों को सीधे सस्ते ट्रैक्टर मिलते हैं, जहां बिचौलियों की भूमिका नहीं है. इससे लागत कम होती है और किसानों को बेहतर डील और सुविधा आसानी से मिलती है.

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बारिश और ओलावृष्टि का नहीं हुआ असर.. देश में पिछले साल से ज्यादा गेहूं उत्पादन की उम्मीद

बारिश और ओलावृष्टि का नहीं हुआ असर.. देश में पिछले साल से ज्यादा गेहूं उत्पादन की उम्मीद

इस सीजन में करीब 6 लाख हेक्टेयर ज्यादा क्षेत्र में गेहूं की बुवाई हुई, जिससे नुकसान कुछ हद तक पूरा हो सकता है. समय पर और जल्दी बुवाई होने से फसल को दाने भरने के समय तेज गर्मी के असर से भी बचाव मिला.

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एक बकरी से हजारों नहीं लाखों की कमाई! जानिए क्यों सोजत नस्ल बन रही पशुपालकों की पहली पसंद

एक बकरी से हजारों नहीं लाखों की कमाई! जानिए क्यों सोजत नस्ल बन रही पशुपालकों की पहली पसंद

सोजत नस्ल की बकरी पालन अब तेजी से मुनाफे का बड़ा जरिया बनता जा रहा है. कम पानी और चारे में भी यह नस्ल अच्छी ग्रोथ देती है. बाजार में इसकी भारी मांग के कारण पशुपालकों को कम लागत में ज्यादा कमाई का मौका मिल रहा है, जिससे ग्रामीण आय में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.