महाराष्ट्र में सहकारी विकास को नई रफ्तार, 3,000 करोड़ निवेश से डेयरी, इथेनॉल और CBG सेक्टर मजबूत होंगे
सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की गई है. इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और नई उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देना है. इससे किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे तथा रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी.
Earthquake In India: बुधवार (स्थानीय समयानुसार) को वेनेजुएला में कुछ ही मिनटों के अंतराल पर दो तेज भूकंप आए. इसके बाद गुरुवार सुबह जम्मू-कश्मीर और असम में भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे लोगों में कुछ देर के लिए दहशत फैल गई. राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार पुलवामा (जम्मू-कश्मीर) में 3.5 और असम के कुछ इलाकों में 3.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया.
Shivraj Singh Chouhan: शिवराज ने बाबुओं को खेत में उतारा! देखिए धान लगाने की नई मशीन का लाइव डेमो
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अत्याधुनिक धान रोपाई मशीन (Paddy Transplanter) का निरीक्षण और प्रदर्शन किया है. यह आधुनिक मशीन न सिर्फ धान की रोपाई को तेज, सटीक और आसान बनाएगी, बल्कि इससे किसानों की मजदूरी और खेती की लागत में भी भारी कमी आएगी। कम समय में अधिक क्षेत्र में रोपाई संभव होने से फसल की बेहतर ग्रोथ होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का साफ कहना है कि आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि की असली कुंजी है। देखिए इस नई तकनीक की पूरी खासियत और ग्राउंड रिपोर्ट इस वीडियो में!
बढ़ते बाजार मूल्य ने बढ़ाया किसानों का भरोसा, मिर्च की खेती का रकबा 30 फीसदी तक बढ़ने के आसार
Red Chilli Cultivation: मिर्च के बढ़ते दाम और बाजार में पुराने स्टॉक की कमी के कारण किसान इस बार फिर बड़े पैमाने पर मिर्च की खेती की ओर लौट रहे हैं. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में मिर्च की बुवाई बढ़ने की उम्मीद है. बीजों की बिक्री भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस साल मिर्च का रकबा काफी बढ़ सकता है.
बरसात में पशुओं के पैरों का रखें खास ध्यान, वरना दूध और कमाई दोनों हो सकते हैं कम
बरसात के मौसम में नमी और कीचड़ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. पैरों और खुरों की सही देखभाल न होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है. कुछ आसान सावधानियां अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रख सकते हैं.