महाराष्ट्र में सहकारी विकास को नई रफ्तार, 3,000 करोड़ निवेश से डेयरी, इथेनॉल और CBG सेक्टर मजबूत होंगे
सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं की घोषणा की गई है. इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक तकनीक, मूल्य संवर्धन और नई उत्पादन क्षमताओं को बढ़ावा देना है. इससे किसानों, सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण उद्योगों को नए अवसर मिलेंगे तथा रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी.
Weather Update Today: देशभर में मौसम तेजी से बदल रहा है. मॉनसून महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कई हिस्सों में आगे बढ़ चुका है और जल्द ही यूपी, बिहार व उत्तराखंड के अन्य इलाकों में भी पहुंच सकता है. दिल्ली, यूपी, बिहार और राजस्थान में अगले कुछ दिनों तक बादल, बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का असर देखने को मिल सकता है.
Shivraj Singh Chouhan: शिवराज ने बाबुओं को खेत में उतारा! देखिए धान लगाने की नई मशीन का लाइव डेमो
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने धान की खेती करने वाले किसानों के लिए एक अत्याधुनिक धान रोपाई मशीन (Paddy Transplanter) का निरीक्षण और प्रदर्शन किया है. यह आधुनिक मशीन न सिर्फ धान की रोपाई को तेज, सटीक और आसान बनाएगी, बल्कि इससे किसानों की मजदूरी और खेती की लागत में भी भारी कमी आएगी। कम समय में अधिक क्षेत्र में रोपाई संभव होने से फसल की बेहतर ग्रोथ होगी और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का साफ कहना है कि आधुनिक तकनीक ही किसानों की समृद्धि की असली कुंजी है। देखिए इस नई तकनीक की पूरी खासियत और ग्राउंड रिपोर्ट इस वीडियो में!
अल नीनो का खतरा, 77 धान और 65 मक्का जिले सबसे ज्यादा संवेदनशील, 10 फीसदी तक नुकसान की आशंका
El Nino Impact India: अल नीनो के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार और आईसीएआर ने उन जिलों की पहचान की है जहां कम बारिश होने पर धान, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है. किसानों को सूखे से बचाने के लिए राज्यों को पहले से तैयारी करने और वैकल्पिक फसल योजना अपनाने की सलाह दी गई है.
बरसात में पशुओं के पैरों का रखें खास ध्यान, वरना दूध और कमाई दोनों हो सकते हैं कम
बरसात के मौसम में नमी और कीचड़ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं. पैरों और खुरों की सही देखभाल न होने पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है, जिसका असर दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है. कुछ आसान सावधानियां अपनाकर पशुपालक अपने पशुओं को स्वस्थ और उत्पादक बनाए रख सकते हैं.