विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल सस्ती बोली से सरकार को कुछ राहत जरूर मिलेगी और रबी व खरीफ सीजन में यूरिया की उपलब्धता बेहतर हो सकती है. लेकिन लंबे समय में सिर्फ आयात के सहारे खेती को चलाना सही रणनीति नहीं है. घरेलू उत्पादन बढ़ाने, यूरिया के संतुलित इस्तेमाल और वैकल्पिक उर्वरकों को अपनाने पर जोर देना जरूरी होगा.
कई घंटों का काम मिनटों में निपटा देती है ये मशीन, किसानों को ज्यादा भाव मिल रहा और समय भी बच रहा
कानपुर देहात जिले के रहने वाले राजेश कुमार ने दो एकड़ जमीन पर गाजर की फसल भी लगाई है. राजेश ने बताया कि उन्होंने गाजर कटाई के बाद बिक्री के लिए उसकी सफाई करते हैं और इस बार वह धुलाई मशीन का इस्तेमाल कर रहे हैं.
दूध देने वाली गाय-भैंस में कैल्शियम की कमी बन सकती है जानलेवा, दुग्ध ज्वर से ऐसे करें बचाव
ब्याने के बाद गाय-भैंस में अचानक कमजोरी और दूध की कमी दुग्ध ज्वर का संकेत हो सकती है. यह बीमारी कैल्शियम की कमी से होती है. समय पर पहचान, संतुलित आहार और सही देखभाल से इस समस्या से पशु को सुरक्षित रखा जा सकता है और डेयरी नुकसान से बच सकती है.
देर से गेहूं की बुवाई का तोड़, जनवरी में अपनाएं ये तकनीक, नुकसान नहीं मुनाफा होगा
जनवरी की कड़ाके की ठंड में गेहूं की बुवाई किसानों के लिए चुनौती बन जाती है. कम तापमान से जमाव प्रभावित होता है, लेकिन सही तकनीक से नुकसान को मुनाफे में बदला जा सकता है. बीज और खाद के संतुलन पर आधारित 25 फीसदी फॉर्मूला इस समय किसानों के लिए कारगर उपाय माना जा रहा है.