परिवार नहीं, अब व्यक्ति के हिसाब से मिलेगा राशन… सरकार के प्रस्ताव से क्या उत्तर-दक्षिण ‘जंग’ छिड़ेगी?
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव के प्रस्ताव ने नई बहस छेड़ दी है. सरकार परिवार की जगह प्रति व्यक्ति 7 किलो राशन देने की तैयारी में है. इससे बड़े परिवारों को फायदा मिल सकता है, लेकिन छोटे परिवारों और दक्षिणी राज्यों पर इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. क्या इससे राशन व्यवस्था कैसे बदल सकती है?
Agriculture News in Hindi: राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगमन के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं. देरी होने से अधिकतर हिस्सों में उमस का असर बना हुआ है. मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में अलग-अलग इलाकों में गरज, चमक और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बरसात का दौर जारी रह सकता है. दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान के कुछ भागों में 2 जुलाई से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने और 2 से 5 जुलाई के दौरान पूर्वी राजस्थान के कुछ और भागों में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है. मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि इस दौरान कोटा और उदयपुर संभाग में कहीं-कहीं भारी बारिश हो सकती है. आज दिनभर की कृषि समाचार (Krashi Samachar) अपडेट्स आपको यहां मिलेंगे.
देश के 6.63 लाख गांवों तक पहुंचा किसान सारथी मंच, किसानों को मिले रिकॉर्ड 19 लाख सवालों के जवाब
Kisan Sarathi Application : केंद्रीय कृषि मंत्रालय के किसान सारथी प्लेटफॉर्म पर 712 कृषि योजनाओं की जानकारी उपलब्ध है और यह राज्यों की किसान सेवाओं, कॉल सेंटर्स से भी अटैच है. इसलिए यह एकीकृत प्लेटफॉर्म है जो देशभर के किसानों के लिए बेस्ट माना गया है.
मॉनसून की मार! उड़द की बुवाई 40 फीसदी घटी, रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है दाल आयात
मॉनसून में देरी और सोयाबीन जैसी वैकल्पिक फसलों की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उड़द दाल का उत्पादन लगातार दबाव में है. 19 जून तक बुवाई का रकबा 40 फीसदी घटा है, जबकि उत्पादन 28 लाख टन से घटकर 22 लाख टन रह गया. विशेषज्ञों के अनुसार, इससे देश की उड़द आयात पर निर्भरता रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती है.
39,803 पशुओं पर AI तकनीक का कमाल, बेहतर नस्ल से बढ़ेगा दूध उत्पादन और किसानों की आमदनी
डेयरी किसानों के लिए अच्छी खबर है. ICAR-NDRI ने AI आधारित नस्ल सुधार मॉडल से बेहतर गुणवत्ता वाले पशु तैयार करने में सफलता हासिल की है. इस पहल से दूध उत्पादन बढ़ने, पशुओं की गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय में बढ़ोतरी की उम्मीद है. यह मॉडल देशभर में लागू किया जा सकता है.