पृथीपाल सिंह पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के साथ जुड़े. इस बीच उनके विद्रोही तेवर बरकरार रहे. इमरजेंसी के समय वह जेल गए. लेकिन दिलचस्प यह है कि इन आंदोलन और विद्रोह का साथ देने वाले पृथीपाल अपनी यूनिवर्सिटी में पूरी तरह का अनुशासन चाहते थे.
प्रेसिशन फार्मिंग में किसानों को बहुत ज्यादा खर्चा करने की जररूत नहीं होती है. बता दें कि, खेती के इस आधुनिक तरीके में किसानों को केवल जरूरत के अनुसार ही खेतों में खाद, पानी और दवा का इस्तेमाल करना होता है.