कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है

Friday, January 2, 2026
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पहली बार स्वीट ऑरेंज की खेप बाहर भेजी गई, अधिक भाव मिलने का रास्ता खुला तो किसानों के चेहरे खिले

एचपी शिवा परियोजना के तहत स्वीट ऑरेंज की सप्लाई दूसरे राज्यों के बाजारों तक किए जाने को मील का पत्थर माना जा रहा है. इससे न केवल प्रदेश के किसानों की मेहनत और उत्पादित फलों की गुणवत्ता प्रमाणित हुई है, बल्कि किसानों को अपनी उपज का स्थानीय बाजार की तुलना में अधिक भाव मिलने का रास्ता भी पक्का हुआ है.

पूजा पाल के धूल रहित गेहूं थ्रेसर मॉडल पर ICAR ने दिखाई रुचि, सांस संबंधी बीमारियों से बचेंगे किसान

पूजा पाल के धूल रहित गेहूं थ्रेसर मॉडल पर ICAR ने दिखाई रुचि, सांस संबंधी बीमारियों से बचेंगे किसान

बाल वैज्ञानिक पूजा पाल ने कहा कि उनके थ्रेसर मॉडल को सराहना मिली है और उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार दिया गया है. डीएम समेत जिले के अधिकारियों ने उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है. पूजा ने कहा कि यह मॉडल बनाने का मकसद किसानों को धूल से होने वाली परेशानी से बचाना है.

महिंद्रा ने दिसंबर 2025 में बेचे 30 हजार से ज्यादा ट्रैक्टर, किसानों की मजबूत मांग बनी वजह
न्यू इयर स्पेशल : मोबाइल के बाद क्या पंचायतें हैं एआई अपनाने को तैयार? खेती में तकनीक का अहम रोल
डीजल को कहें अलविदा! CNG-CBG ट्रैक्टर से खेती होगी सस्ती, साफ और ज्यादा मुनाफेदार
छोटे किसानों की कमाई बढ़ाने वाले ट्रैक्टर इम्प्लीमेंट्स, जानिए कौन-सा है आपके लिए सही
दवा से नहीं अब इससे बचेगी पशुओं की जान, फ्रूट थेरेपी बनी दुधारू पशुओं की नई संजीवनी

दवा से नहीं अब इससे बचेगी पशुओं की जान, फ्रूट थेरेपी बनी दुधारू पशुओं की नई संजीवनी

पशुओं का इलाज अब सिर्फ दवा और इंजेक्शन तक सीमित नहीं रहा. फ्रूट थेरेपी नाम की यह आधुनिक तकनीक कमजोर, बीमार और दुधारू पशुओं के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही है. सही समय पर दी गई यह थेरेपी पशु को ताकत देती है, हालात सुधारती है और जान भी बचा सकती है. ऐसे में आइए जानते हैं फ्रूट थेरेपी का बारे में….

खाद सब्सिडी भुगतान में डिजिटल क्रांति, केंद्र ने लॉन्च किया ई-बिल प्लेटफॉर्म…जानिए इसके फायदे

खाद सब्सिडी भुगतान में डिजिटल क्रांति, केंद्र ने लॉन्च किया ई-बिल प्लेटफॉर्म…जानिए इसके फायदे

अब तक खाद सब्सिडी के बिल मैन्युअल तरीके से तैयार होते थे. फाइलें एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक घूमती थीं, जिससे भुगतान में महीनों की देरी हो जाती थी. नए ई-बिल सिस्टम के लागू होने से यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल हो गई है. अब बिलों की कोई फिजिकल मूवमेंट नहीं होगी और पूरा काम ऑनलाइन माध्यम से किया जाएगा.

किसानों के साथ धोखा पड़ेगा महंगा, नकली बीज और कीटनाशकों पर केंद्र का बड़ा एक्शन
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